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गाजियाबाद में मास्‍टर प्‍लान 2031 पर काम अप्रैल से होगा शुरू

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Updated Tue, 11 Jan 2022 13:36 IST

गाजियाबाद में मास्‍टर प्‍लान 2031 पर काम अप्रैल से होगा शुरू

जिले में मास्‍टर प्‍लान 2031 पर काम अप्रैल से शुरू होगा. मास्‍टर प्‍लान को आचार संहिता लगने से पहले शासकीय समिति ने से मंजूरी मिल चुकी है. माना जा रहा है कि चुनाव संपन्‍न होने और सरकार बनने के बाद यानी अप्रैल से इस योजना पर काम शुरू होगा. शासकीय समिति की मंजूरी के बाद बोर्ड की बैठक से मंजूरी दी जाएगी. एनएच 24, दिल्‍ली मेरठ एक्‍सप्रेसवे और इस्‍टर्न पेरीफेरल बनने के आसपास कई योजना डेवलप की जाएंगी.

गाजियाबाद विकास प्राधिकरण के अधिकारियों के अनुसार नए मास्टर प्लान में 27 हजार पंजीकृत उद्योगों के लिए ट्रांसपोर्ट नगर के साथ कई बड़ी मांगें पूरी हो सकेंगी. नए मास्टर प्लान में गाजियाबाद-डासना, मोदीनगर-मुरादनगर और लोनी का 55 हजार हेक्टेयर क्षेत्र शामिल किया गया है. साथ ही, आवासीय योजनाएं विकसित की जाएंगी.

मास्‍टर प्‍लान 2031 के अनुसार होगा विकसित

ट्रांसपोर्टनगर और औद्योगिक हब
मास्टर प्लान-2031 में सबसे ज्यादा 35 हजार हेक्टेयर क्षेत्र गाजियाबाद व डासना में शामिल है. डासना और उसके आसपास नया औद्योगिक हब विकसित होगा. डासना के पास ही वेयर हाउस और लॉजिस्टिक हब की स्थापना होगी. दो दशक से ज्यादा समय चल रही ट्रांसपोर्टनगर की मांग इसी क्षेत्र में पूरी होगी. डासना व दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे से सटे क्षेत्र में ट्रांसपोर्ट नगर के लिए जमीन निर्धारित है.

आवासीय योजनाएं आएंगी
मास्टर प्लान में मोदीनगर व मुरादनगर में 60 हेक्टेयर और लोनी में 20 हेक्टेयर जमीन का भू-उपयोग कृषि से बदलकर आवासीय करने का रास्ता साफ हो गया है. रैपिड रेल कॉरिडोर के चलते मोदीनगर और मुरादनगर क्षेत्र नई आवासीय योजनाओं का केंद्र होगा. नए मास्टर प्लान का सबसे ज्यादा लाभ देहात क्षेत्र के लोगों को मिलेगा.

इंटर स्टेट टर्मिनल बनेगा
मास्‍टर प्‍लान में डासना-दुहाई के पास इंटर स्टेट टर्मिनल विकसित करने की तैयारी है. भू-उपयोग परिवर्तन के साथ ही दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस-वे, रैपिड कॉरिडोर, ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे के बराबर में योजना को आगे बढ़ाया जा सकेगा। इंटरस्टेट टर्मिनल के गाजियाबाद में बनने से शहर को एक और उपलब्धि हासिल होगी.

ग्रीन एरिया 14 फीसदी करने की तैयारी
मास्टर प्लान -2021 में कुल चयनित क्षेत्र का 12 फीसदी हरित क्षेत्र को नए मास्टर प्लान में लक्ष्य दो फीसदी बढ़ाकर 14 फीसदी कर दिया गया है. इससे शहरवासियों को प्रदूषण से निजात मिलेगी.

 

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