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03 Mar, 2026
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Updated Mon, 29 Nov 2021 12:47 IST
हर चीज की विमानों की भी एक उम्र होती है. उसके बाद उन्हें रिटायर कर दिया जाता है. आमतौर पर विमानों की रिटायरमेंट एज 25 साल होती है. हालांकि बहुत से अच्छी मेंटीनेंस पर और ज्यादा भी चल जाते हैं. रिटायर होने के बाद विमानों की आखिरी फ्लाइट स्टोरेज डिपो की ओर होती है. जिसे एयरप्लेन बोनयार्ड या ग्रेवयार्ड भी कहते हैं.

क्या आपको मालूम है कि विमान जब रिटायर हो जाते हैं तो उनका क्या होता है और उनकी आखिरी फ्लाइट दुनिया में किधर की ओर होती है, जिसे विमानों की कब्रगाह भी कहा जाता है. वैसे विमानों का स्टोरेज डिपो दुनियाभर में है लेकिन एक देश में खासतौर पर इस तरह डिपो कई हैं, जहां एक दो नहीं बल्कि सैकड़ों रिटायर विमानों को पनाह मिलती है. कई बार जब कंपनियां अपने उड़ान को किसी वजह से कैंसिल कर देती हैं या कोई एयरलाइंस काम करना बंद कर देती है तो वो भी कुछ समय के लिए अपने विमानों को स्टोरेज डिपो में लाकर खड़ा कर देती हैं. उसके बदले रेंट चुकाती हैं.

ऐसे स्टोरेज डिपो सबसे ज्यादा अमेरिका के दक्षिणी या पश्चिमी प्रांतों में हैं. वहां बड़ी बड़ी खाली जगहें हैं. जहां ऐसे स्टोरेज डिपो बनाना आसान है. अमेरिका में कई रेगिस्तानी इलाके भी विमानों के लिए स्टोरेज डिपो बनाए जा चुके हैं. यहां बड़ी संख्या में रिटायर हुए विमान आकर स्थायी तौर पर आराम करने लगते हैं.

यहां जब विमान पहुंचते हैं तो सबसे पहले उनकी तेज धुलाई होती है, इस धुलाई में ऐसे रसायन भी मिले होते हैं कि विमान की बॉडी में अगर कहीं कोई साल्ट जैसी चीज आ गई हो तो खत्म हो जाए और इसकी बॉडी जंगरोधक हो जाए. इसके बाद इसके ईंधन टैंक से पूरी तरह ईंधन निकाल लिया जाता है.

फिर शुरू होता है इसके एक एक पुर्जे, मशीनें और सामान निकालने का काम. विमान में कुल मिलाकर 3.5 लाख कंपोनेंट होते हैं. जिन्हें निकाल दिया जाता है. इन चीजों का इस्तेमाल दूसरे विमानों के पुर्जों के तौर पर होता है. इनकी विमान रिपेयरिंग मार्केट में बहुत डिमांड रहती है. अब बचता है विमान का खांचा.

फिर क्रेन और मशीनों की मदद से इस बॉडी यानि खांचे को डिस्मेंटल करने का काम शुरू होता है. विमान की पूरी बॉडी. डैने आदि अलग अलग करके क्रश कर दिये जाते हैं और उन्हें गलाया जाता है ताकि रिसायकल करके उनका दोबारा इस्तेमाल किया जा सके. कई बार विमानों की खाली बॉडी को कुछ इच्छुक कंपनियां खरीद भी लेती हैं.

मसलन स्वीडन में एक कंपनी ने कई खाली विमा्नों की बॉडी को लेकर उसे 25 कमरों के होटल में बदल दिया है. तुर्की में रेस्टोरेंट खोल दिया गया है. भारत में भी दिल्ली से हरियाणा जाते हुए खाली विमान के खांचे खड़े नजर आते हैं. लेकिन सबसे शानदार काम हुआ है मैक्सिको में, जहां 200 विमानों की खाली बॉडी को मिलाकर एक विशालकाय गिलेस्को लाइब्रेरी बना दी गई है.

इस लाइब्रेरी में अंदर बहुत कुछ बनाया गया है. बोइंग 727 और 737 के खांचों को मिलाकर बनी इस लाइब्रेरी में अगर तमाम किताबों से जुड़ी लाइब्रेरी की लॉबीज हैं तो मीटिंग रूम, दो ऑडिटोरियम और कई तरह के अलग कक्ष हैं. ये बहुत सुंदर और अलग ही नजर आती है.







