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क्या है अब्राहमी धर्म और इन दिनों क्यों है यह सुर्खियों में

नौकरियां

Updated Sun, 21 Nov 2021 21:35 IST

क्या है अब्राहमी धर्म और इन दिनों क्यों है यह सुर्खियों में

धर्म (Religion) के नाम पर दुनिया में राजनीति कोई नई बात नहीं  है. कई बार राजनीति के लिए नया धर्म तक बन जाता है. और नए धर्म को भी शक की निगाह से देखना कोई हैरानी की बात नहीं हैं. वहीं दुनिया में कई जगह ऐसी हैं जहां नया धर्म नए रास्ते के तौर पर देखा जाता है अरब देशों में प्रचलित इस्लाम धर्म के बारे में भी कहा जाता है कि वहां के लोग अपने ही धर्म पर केंद्रित रहते हैं. लेकिन इन दिनों अरब देशों (Arab Nations) ओ में एक नए धर्म को लेकर बहस हो रही है. इस धर्म का नाम अब्राहमी धर्म (Abrahamic Religion) बताया जा रहा है.

क्यों हो रही है इसकी चर्चा
हाल ही में यह धर्म सुर्खियों में तब आया जब मिस्र में धार्मिक एकता के लिए शुरू हुई मिस्र फैमिली हाउस की वर्षगांठ के मौके पर एक इमाम ने अब्राहमी धर्म की जम कर आलोचना की. लेकिन बताया यह जा रहा है कि अरब देशों में इसको लेकर पिछले एक साल से हलचल देखी जा रही है.

हैरानी की बात
सबसे रोचक बात तो यह है कि ना तो यह औपचारिक रूप से स्थापित कोई धर्म है, ना इसके कोई अनुयायी हैं और ना ही इसकी कोई नींव है. विशेषज्ञों का यहां तक कहना है कि यह सिर्फ एक धार्मिक प्रोजेक्ट है. इस प्रोजेक्ट का मकसद इस्लाम ,ईसाई और यहूदी धर्म के बीच समानता को देखते हए  इनके बीच के मतभेदों को मिटाना है. वैसे भी आमतौर पर इन तीनों धर्मों को अब्राहमी धर्म की श्रेणी में ही रखा जाता है.

तो क्या है अब्राहमी धर्म
इस प्रोजेक्ट के तहत तीनों धर्मों की समानता के मद्देनजर पैगंबर अब्राहम के नाम पर एक नया धर्म बनाने के प्रयास हो रहे हैं. बताया जा रहा है कि इस धर्म का मकसद इस्लाम, ईसाई और यहूदियों की साझा आस्थाओं और विश्वासों पर महत्व देना है और आपसी मतभेदों और विवादों से दूर रहना है. जिससे धर्म की राह पर चलते हुए शांति स्थापित की जा सके.

क्या है तीनों धर्मों का यह साझा संबंध
इब्राहीमी धर्म उन धर्मों को कहते हैं जो एक ईश्वर को मानते हैं एवं अब्राहम को ईश्वर का पैग़म्बर मानते है. पैगंबर ईश्वर के संदेशवाहक को कहा जाता है.  इनमें यहूदी, ईसाई, इस्लाम जैसे धर्म प्रमुख रूप से शामिल हैं.  ये धर्म मध्य पूर्व में पनपे थे और एकेश्वरवादी हैं. इसके अलावा भी कई धार्मिक मान्यताएं भी इन धर्मों में एक सी पाई जाती हैं.

इमाम ने क्यों की आलोचना
मिस्र फैमिली हाउस की दसवीं वर्षगांठ के अवसर पर अल-अजहर के सर्वोच्च इमाम अहमद अल तैय्यब ने इस धर्म की आड़े हाथों लिया और कहा कि जो लोग ईसाई, यहूदी और इस्लाम को एक करने पर जोर देंग. लेकिन  दूसरे धर्मों का सम्मान करना और उन्हें मानना ​​दो अलग-अलग चीजें हैं. उनके मुताबिक सभी धर्मों के लोगों को एक साथ लाना असंभव है. मिस्र के कॉप्टिक पादरियों ने भी अब्राहमी धर्म के अस्तित्व का विरोध किया है.

महज एक राजनीतिक आमंत्रण
माना जा रहा है कि अब्राहमी धर्म धोखे और शोषण की आड़ में एक राजनीतिक आमंत्रण है. इसका ताल्लुक संयुक्त अरब अमीरात, यूएई और इजराइल के बीच संबंध सुधारने के लिए पिछले साल किए गए एक समझौते से बताया जा रहा है. इस समझौते तो अब्राहमी समझौता कहा जाता है. अमेरिका ने इस समझौते को शांति बढ़ाने वाला और देशों के बीच सांस्कृतिक और अंतरधार्मिक संवाद स्थापित करने वाला बताया था.

इस समझौते के विरोधियों को अब्राहमी धर्म की चर्चा एक बड़ा बहाना मिल गया. विरोध करने वाले कई तरह की दलीलें दे रहे हैं.  कुछ इस्लामी घर्म गुरुओं का मानना है कि यह इस्लामी धर्म और धार्मिक एकता को अलग अलग दिखाने का प्रयास है, जबकि दोनों में कोई विरोधाभास नहीं है. अभी इसका विरोध अब दुनिया के सामने आ गया है लेकिन इसका समर्थन करने वालों की भी कमी नहीं हैं.

 

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