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केंद्रीय मंत्री मीनाक्षी लेखी ने प्रदर्शनकारी किसानों को बताया 'मवाली', कहा- विपक्ष दे रहा बढ़ावा

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Updated Thu, 22 Jul 2021 23:01 IST

केंद्रीय मंत्री मीनाक्षी लेखी ने प्रदर्शनकारी किसानों को बताया 'मवाली', कहा- विपक्ष दे रहा बढ़ावा

नई दिल्ली. केंद्रीय मंत्री मीनाक्षी लेखी ने गुरुवार को कृषि कानूनों का विरोध कर रहे किसानों (Farmers Protest) को लेकर विवादित बयान दिया. लेखी ने प्रदर्शनकारी किसानों की तुलना मवालियों से करते हुए प्रदर्शन को आपराधिक करार दिया. लेखी ने कहा कि जो 26 जनवरी को हुआ वह भी शर्मिंदा करने वाली आपराधिक गतिविधि थी. लेखी ने विपक्ष पर आरोप लगाते हुए कहा कि वह ऐसी गतिविधियों में सहयोग करता है. केंद्रीय मंत्री ने गुरुवार को हुई किसान संसद में एक मीडिया कर्मी के घायल होने के बाद यह बात कही. लेखी ने कहा कि वह किसान नहीं मवाली हैं. यह आपराधिक गतिविधि है.
दरअसल, नये कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन करते हुए 200 किसानों के एक समूह ने मध्य दिल्ली के जंतर मंतर पर गुरुवार को 'किसान संसद' शुरू की. इस दौरान एक समाचार चैनल के वीडियो पत्रकार के साथ कथित तौर पर ‘‘दुर्व्यवहार’’ का मामला सामने आया. एक पत्रकार ने इसी घटना के संदर्भ में भाजपा की प्रतिक्रिया जानने के लिए लेखी से जब आंदोलनकारियों को किसान कहकर संबोधित करते हुए अपना सवाल पूछा तो इसके जवाब में उन्होंने कहा, ‘‘फिर आप उन लोगों को किसान बोल रहे हैं...मवाली हैं वह लोग.’’

उन्होंने आगे कहा, ‘‘मीडिया पर हमला आपराधिक गतिविधि है..जो कुछ 26 जनवरी को हुआ वह भी शर्मनाक था. वह भी आपराधिक गतिविधियां थीं और विपक्ष द्वारा ऐसी चीजों को बढ़ावा दिया गया.’’

इससे पहले, इसी प्रकरण से जुड़े एक अन्य सवाल पर भी आंदोलनकारियों को किसान कहने पर लेखी बिफर पड़ी. उन्होंने कहा, ‘‘पहली बात उन लोगों को किसान कहना बंद कीजिए. क्योंकि वह किसान नहीं हैं. वह ‘षडयंत्रकारी’ लोगों के हत्थे चढ़े कुछ लोग हैं जो कि किसानों के नाम पर यह ‘हरकतें’ कर रहे हैं.’’ उन्होंने कहा कि किसानों के पास इतना समय नहीं है कि वह जंतर-मंतर पर आकर धरने पर बैठे.

उन्होंने कहा, ‘‘किसान अपने खेतों में काम कर रहा है. ये आढ़तियों द्वारा चढ़ाए गए लोग हैं जो चाहते ही नहीं कि किसानों को किसी प्रकार का सीधा फायदा मिले.’’

 

मीडिया पर कथित हमले पर उन्होंने कहा, ‘‘किसी भी मीडिया को रोकने का प्रयास करना ही लोकतंत्र के खिलाफ है. यही लोग तो लोकतंत्र की दुहाई देते हैं.’’
 
 
 

 

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