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युगांडा का इकलौता एयरपोर्ट अब चीन के कब्जे में, जानें कैसे ड्रैगन ने अफ्रीकी देश को अपने जाल में फंसाया

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Updated Mon, 29 Nov 2021 12:12 IST

युगांडा का इकलौता एयरपोर्ट अब चीन के कब्जे में, जानें कैसे ड्रैगन ने अफ्रीकी देश को अपने जाल में फंसाया

नई दिल्ली. कर्ज ना चुकाने की वजह से विदेश संपत्ति को हासिल करने के मामले में चीन एक कदम और आगे बढ़ गया है. कहा जा रहा है कि चीन ने कथित तौर पर युगांडा एंटेबे अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे और पूर्वी अफ्रीकी देश में अन्य संपत्तियों पर कब्जा कर लिया है.

इसी के मद्देनजर युगांडा के राष्ट्रपति योवेरी मुसेवेनी (Uganda President Yoweri Museveni) ने चीनी सरकार के साथ फिर से बातचीत के लिए एक प्रतिनिधिमंडल बीजिंग भेजा था. हाल ही में मुसेवेनी के नेतृत्व वाली सरकार ने एंटेबे अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के विस्तार के लिए चीन के एक्ज़िम बैंक के साथ 20 करोड़ 70 लाख डॉलर उधार लेने के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए थे.

कर्ज लौटाने की सीमा 20 साल थी
अफ्रीकी खबरों से संबंधित एक समाचार पोर्टल SaharaReporters.com के अनुसार, ऋण की परिपक्वता अवधि 20 साल की थी जिसमें 7 साल की छूट अवधि भी शामिल थी, लेकिन अब ऐसा लगता है कि चीन के एक्ज़िम बैंक के साथ हस्ताक्षरित लेन-देन का मतलब यह है कि युगांडा ने अपने एकमात्र अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे को ‘उसके हवाले’ कर दिया है.

हालांकि, युगांडा ने सौदे पर फिर से बातचीत करने की कोशिश की, लेकिन उसे सफलता नहीं मिली. मार्च 2021 में युगांडा ने सौदे की शर्तों पर फिर से बातचीत करने की उम्मीद में एक प्रतिनिधिमंडल बीजिंग भेजा था.

एंटेबे एयरपोर्ट युगांडा का एकमात्र अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा
एक अन्य पोर्टल Allafrica.com की एक रिपोर्ट के अनुसार, “इस रहस्य से पर्दा उठने के बाद कि युगांडा सरकार ने एक समझौते पर हस्ताक्षर किए और दूसरों के साथ अपनी संप्रभु संपत्ति के इस्तेमाल के लिए छूट को माफ कर दिया, यह उन जांच के स्तरों पर सवाल उठाते हैं जो कि नौकरशाह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कोई सौदेबाजी करने से पहले करते हैं.” एंटेबे अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा युगांडा का एकमात्र अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा है और यह प्रति वर्ष 19 लाख से अधिक यात्रियों के भार को संभालता है.

कई देशों में, जिनमें कुछ अफ्रीकी देश भी शामिल है… जल्दबाजी में या उचित जांच के बिना हस्ताक्षरित वाणिज्यिक ऋणों को चुकाने में विफल रहने के बाद, चीन ने प्रत्यक्ष नियंत्रण द्वारा उनकी राष्ट्रीय संपत्ति को जब्त कर लिया है.

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