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10 May, 2026
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Updated Wed, 11 Aug 2021 17:34 IST
नई दिल्ली: अफगानिस्तान में अफगान सुरक्षा बलों और तालिबान के बीच भीषण लड़ाई के साथ स्थिति बद से बदतर होती जा रही है. भारतीय राजनयिकों सहित कुल 50 भारतीय नागरिकों को मजार-ए-शरीफ से सुरक्षित निकालकर दिल्ली लाया गया. एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने इसकी जानकारी दी है. उन्होंने कहा कि भारत ने मजार-ए-शरीफ में अपने महावाणिज्य दूतावास कार्यालय को अस्थायी रूप से बंद कर दिया है.
मंगलवार को हुई भयंकर गोलीबारी
गौरतलब है कि तालिबान ने राजधानी काबुल से 140 मील उत्तर में प्रमुख अफगान शहर पुल-ए-खुमरी पर कब्जा कर लिया है. विद्रोहियों और स्थानीय अधिकारियों के अनुसार गार्जियन ने इसकी सूचना दी. शहर के 2 अधिकारियों ने बताया कि मंगलवार को भारी लड़ाई के बाद अधिकारियों और सुरक्षा बलों ने अपने परिसर को छोड़ दिया. इसके बाद तालिबान का इस पर कब्जा हो गया. एक अधिकारी ने बताया कि 'पुल-ए-खुमरी तालिबान के हाथों आ गया, वे हर जगह हैं. इस दौरान भारी गोलियों की आवाज सुनी जा सकती है.'
बाइडन ने कहा- हमें अफगान से हटने का अफसोस नहीं
मंगलवार को अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने भी अफगान-तालिबान मसले पर बड़ी टिप्पणी की थी. उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान से हटने के अपने फैसले पर उन्हें खेद नहीं है. यह भी कहा कि वाशिंगटन ने 20 सालों में 1 ट्रिलियन डॉलर से ज्यादा खर्च किया है और अपने हजारों सैनिकों को खो दिया है.
बाइडन ने व्हाइट हाउस में संवाददाताओं से कहा, "अफगान नेताओं को एक साथ आना होगा, अफगान सैनिकों की संख्या तालिबान से अधिक है और उन्हें लड़ना चाहिए. उन्हें अपने लिए लड़ना होगा, अपने देश के लिए लड़ना होगा."
अफगान नेताओं को आना होगा साथ- बाइडन
उन्होंने कहा कि अमेरिका अफगान बलों को महत्वपूर्ण हवाई सहायता, भोजन, उपकरण और वेतन देना जारी रखे हुए है. बाइडन ने कहा कि अफगान सैनिकों को अपने लिए लड़ना चाहिए, क्योंकि पिछले कुछ दिनों में कई शहर तालिबान के कब्जे में आ गए हैं. बाइडन ने कहा, "हमने 20 सालों में एक ट्रिलियन डॉलर से ज्यादा खर्च किए. हमने 300,000 से अधिक अफगान बलों को प्रशिक्षित और आधुनिक उपकरणों से लैस किया. अब अफगान नेताओं को एक साथ आना होगा. उन्हें अपने लिए और अपने देश के लिए लड़ना होगा."
20 सालों में 2400 से अधिक अमेरिकी सैनिक मारे गए
पिछले दो दशकों में अफगानिस्तान में 2,400 से ज्यादा अमेरिकी सैनिक मारे गए हैं और 20,000 घायल हुए हैं. इस बीच, अनुमान बताते हैं कि 66,000 से ज्यादा अफगान सैनिक मारे गए और 27 लाख से ज्यादा लोगों को अपना घर छोड़ना पड़ा है.
बता दें कि मंगलवार को ही अफगानिस्तान के मजार-ए-शरीफ में भारतीय महावाणिज्य दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कहा था, कि मजार-ए-शरीफ से नई दिल्ली के लिए एक विशेष उड़ान रवाना हो रही है. मजार-ए-शरीफ और उसके आसपास के किसी भी भारतीय नागरिक से अनुरोध किया गया था कि वह देर शाम प्रस्थान करने वाली विशेष उड़ान में भारत के लिए प्रस्थान करें.
वाणिज्य दूतावास ने लोगों से उनका विवरण मांगा
वाणिज्य दूतावास ने उन भारतीय नागरिकों से उनके ठिकाने की जानकारी मांगी है, जो भारत के लिए रवाना होना चाहते हैं. अफगानिस्तान में भारतीय दूतावास ने भी भारतीय नागरिकों को सलाह दी थी कि वे वाणिज्यिक उड़ानों की उपलब्धता के बारे में खुद को अपडेट रखें और हवाई सेवाएं बंद होने से पहले लौटने की तत्काल व्यवस्था करें.
इसके अलावा, दूतावास ने अफगानिस्तान में काम कर रही भारतीय कंपनियों को अपने भारतीय कर्मचारियों को देश में चल रही परियोजनाओं से तुरंत वापस बुलाने का निर्देश दिया है. भारतीयों के लिए, जो विदेशी फर्मों के लिए काम कर रहे हैं, दूतावास ने उनसे अपने नियोक्ताओं से परियोजना स्थलों से भारत की यात्रा की सुविधा के लिए अनुरोध करने के लिए कहा है.
तालिबानी कब्जे में कई अफगानी प्रदेश
अफगान सरकार तालिबान के हमलों को रोकने में नाकाम हो रही है. हालिया दिनों में तालिबान ने अफगानिस्तान के करीब दो तिहाई से अधिक इलाकों पर इलाकों पर कब्ज़ा कर लिया है. हेरात और कंधार जैसे प्रमुख शहरों में तालिबान की लड़ाई अफगान सुरक्षा बलों से जारी है. रिपोर्ट्स बताती हैं कि कम से कम 12 प्रदेश की राजधानियों को सीधे तौर पर तालिबान से खतरा है.







