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Updated Thu, 1 Jul 2021 23:00 IST
नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर कर उन 13 दोषियों को तत्काल जेल से रिहा करने की मांग की गई है जिन्हें अपराध के वक्त नाबालिग घोषित किया जा चुका है. ये सभी फिलहाल आगरा सेंट्रल जेल में बंद हैं और उन्हें खूंखार अपराधियों के साथ जेलों में रखा गया है. वकील ऋषि मल्होत्रा के द्वारा इस याचिका में कहा गया है कि 2012 में इलाहाबाद हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दायर किए जाने के बाद जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड को कैदियों की किशोरावस्था से संबंधित आवेदनों का निपटारा करने के निर्देश दिए गए थे. इसके बाद सभी 13 याचिकाकर्ताओं को अपराध किए जाने के समय किशोर घोषित किया गया था.
यानी बोर्ड ने पाया था कि अपराध के समय इन सभी की आयु 18 वर्ष से कम थी. कोर्ट में दाखिल याचिका में कहा गया है कि जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड की ओर से फरवरी 2017 से इस साल मार्च के बीच याचिकाकर्ताओं को किशोर घोषित करने के स्पष्ट आदेश के बावजूद इन सभी को रिहा करने के लिए कोई कदम नहीं उठाया गया. अब सुप्रीम कोर्ट में दाखिल इस याचिका में मांग की गई है कि उन 13 दोषियों को तत्काल रिहा कर दिया जाए.
तिहाड़ जेल से छोड़े गए करीब 4000 से अधिक कैदी
गौरतलब है कि सोमवार के दिन ही दिल्ली की तिहाड़ जेल से करीब चार हजार कैदियों को अस्थायी तौर पर छोड़ दिया गया है. इतने सारे कैदियों के छोड़े जाने से दिल्ली में अपराध बढ़ने का भी डर सता रहा है ऐसा अनुमान लगाया जा रहा है कि चूंकि दिल्ली में अनलॉक की प्रक्रिया शुरू हो गई है ऊपर से इतने सारे कैदियों को एक साथ छोड़ा गया है.







