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FATF की ‘ग्रे’ सूची से निकलने को तड़प रहा पाकिस्तान, पीएम इमरान का नया पैंतरा

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Updated Mon, 17 May 2021 22:46 IST

FATF की ‘ग्रे’ सूची से निकलने को तड़प रहा पाकिस्तान, पीएम इमरान का नया पैंतरा

इस्लामाबाद. वित्तीय कार्रवाई कार्य बल (एफएटीएफ) की ‘ग्रे’ सूची में से बाहर निकलने के लिए पाकिस्तान हर जतन कर रहा है. अब जबकि एफएटीएफ की समीक्षा बैठक में कुछ ही दिनों का समय बचा है, पाकिस्तान ने आतंकी गतिविधियों को रोकने के लिए इनकी जांच विशेष एजेंसी से कराने के लिए नियम कायदे तय किए हैं. हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान द्वारा उठाए गए कदम उसे एफएटीएफ की ‘ग्रे’ सूची से बाहर निकालने के लिए नाकाफी साबित होंगे. आतंक के खिलाफ पाकिस्तान की मंशा हमेशा संदिग्ध रही है. इसी क्रम में ब्रिटेन ने टेरर फाइनेंसिंग और मनी लॉन्ड्रिंग का हवाला देते हुए हाल ही में पाकिस्तान को हाई रिस्क वाले देशों की सूची में डाल दिया है.

बता दें कि धनशोधन और आतंकवाद का वित्तपोषण करने के मामलों पर निगरानी करने वाली वैश्विक संस्था पेरिस स्थित एफएटीएफ ने जून 2018 में पाकिस्तान को ‘ग्रे’ सूची में डाल दिया था और तब से देश इससे निकलने की कोशिश में लगा हुआ है. इससे पहले ‘डॉन’ अखबार ने खबर दी थी कि इन बदलावों में धन शोधन रोधी (एएमएल) मामलों की जांच और अभियोजन का जिम्मा पुलिस, प्रांतीय भ्रष्टाचार रोधी प्रतिष्ठान (एसीई) और अन्य एजेंसियों से लेकर विशिष्ट एजेंसियों को देना शामिल है. ये दो नियमों का हिस्सा है, जिनमें एएमएल (ज़ब्त संपत्ति प्रबंधन) नियम 2021 और एएमएल (रेफरल) नियम 2021 शामिल हैं जो ‘नेशनल पॉलिसी स्टेटमेंट ऑन फॉलो मनी’ के तहत आता है. खबरों के मुताबिक इसे कुछ दिन पहले संघीय मंत्रिमंडल ने मंजूरी दे दी है.

धन शोधन रोधी अधिनियम 2010 (एएमएलए) की मौजूदा सूची में कुछ बदलाव के लिए नियम और संबंधित अधिसूचनाएं प्रशासकों और विशेष सरकारी अभियोजकों की नियुक्ति के तुरंत बाद लागू होंगी. इन उपायों के आधार पर एफएटीएफ यह तय करेगा कि क्या 27 में से तीन शेष मानदंडों को पाकिस्तान ने पूरा किया है या नहीं, जिस वजह से पाकिस्तान इस साल फरवरी में ’ग्रे’ सूची से बाहर नहीं निकल सका था.
एफएटीएफ की कई समीक्षा बैठकें जून के दूसरे हफ्ते में शुरू होनी हैं और उसका पूर्ण सत्र 21-25 जून को होगा. अब सरकार ने दर्जनों प्रशासकों को नियुक्त करने का निर्णय किया है, जिन्हें संपत्तियों के मूल्य को संरक्षित रखने के लिए जब्त करने, प्राप्त करने, प्रबंधन करने, किराये पर देने, नीलामी करने, हस्तांतरण करने या निपटान करने या अन्य उपाय करने के अधिकार दिए गए हैं.

 

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