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नीदरलैंड में ओमिक्रॉन का बढ़ा खतरा, क्रिसमस से पहले लगा लॉकडाउन

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Updated Sun, 19 Dec 2021 13:13 IST

नीदरलैंड में ओमिक्रॉन का बढ़ा खतरा, क्रिसमस से पहले लगा लॉकडाउन

एम्सटर्डम. नीदरलैंड्स में कोरोना वायरस के नए वेरिेएंट ओमिक्रॉन के बढ़ते खतरे को देखते हुए क्रिसमस से पहले लॉकडाउन का ऐलान किया गया है. लॉकडाउन को लेकर कड़े दिशा निर्देश जारी किए गए हैं. गैर जरूरी दुकानें, जिम और सार्वजनिक स्थानों को बंद करने के आदेश दिए गए हैं. लॉकडाउन कम से कम जनवरी के दूसरे हफ्ते तक लागू रहेगा. बता दें कि यूरोप के कई देशों में ओमिक्रॉन के चलते पाबंदियां लगाने का ऐलान किया गया है.

आदेश के मुताबिक नीदरलैंड्स के सारे स्कूल कम से कम 9 जनवरी तक बंद रहेंगे. किसी के घर में 13 साल से ज्यादा उम्र के 2 से ज्यादा गेस्ट को आने की अनुमति नहीं होगी. 24 से 26 दिसंबर यानी क्रिसमस के दिनों में घर के अंदर कम से कम चार गेस्ट आ सकते हैं. इसके अलावा स्टेडियम में बिना दर्शकों के मैच खेले जाएंगे.

क्या है वैक्सीनेशन का हाल?

नीदरलैंड्स में अब तक 85% लोगों को वैक्सीन की दोनों डोज़ लग चुकी है. इसके अलावा 9 फीसदी लोगों को बूस्टर डोज़ भी दे दी गई है. उधर फ्रांस, आयरलैंड और जर्मनी ने भी ओमिक्रॉन से बचने के लिए कई पाबंदियों का ऐलान किया है. फ्रांस के प्रधानमंत्री जीन कास्टेक्स ने चेतावनी दी है कि ओमिक्रॉन यूरोप में बिजली की रफ्तार से फैल रहा है और संभवत: अगले साल की शुरुआत तक फ्रांस में प्रभावी हो जाएगा.

बच्चों के लगेगी वैक्सीन

नीदरलैंड सरकार ने इसी हफ्ते पांच साल से 11 साल तक के बच्चों के लिए कोविड-19 वैक्सीन देने का रास्ता साफ कर दिया है. देश के स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि बच्चों का ये टीकाकरण मध्य जनवरी में शुरू होगा. बच्चों को वयस्कों की तुलना में फाइजर के टीके की छोटी खुराक मिलेगी और ये माता-पिता पर निर्भर करता है कि वे अपने बच्चों को टीका लगवाते हैं या नहीं. सरकार ने कहा कि कोरोना वायरस से संक्रमित अधिकतर बच्चों में केवल हल्के लक्षण विकसित होते हैं, लेकिन बहुत कम संख्या में बच्चे गंभीर रूप से बीमार हो सकते हैं.

क्या कहा WHO ने?
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने शनिवार को बताया कि 89 देशों में कोरोना वायरस का नया वेरिएंट ओमिक्रॉन फैल गया है. WHO के मुताबिक हर डेढ़ से 3 दिनों में ये वायरस दोगुनी रफ्तार से बढ़ रहा है. दुनिया भर के डॉक्टरों की नज़र फिलहाल इस वेरिएंट पर टिकी हैं. फिलहाल ये कहना मुश्किल है कि मौजूदा वैक्सीन इसके खिलाफ कितना प्रभावी है.

 

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