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10 May, 2026
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Updated Tue, 18 May 2021 18:41 IST
काठमांडू. नेपाल इस वक्त कोरोना के कहर के अलावा राजनीतिक उठापटक से भी जूझ रहा है. एक बार फिर सीपीएन-यूएमएल के नेता केपी शर्मा ओली को प्रधानमंत्री पद की शपथ दिलाई गई है. वो बात अलग है कि इस शपथ को लेकर भी काफी विवाद हुआ. फिलहाल प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली की अगुआई वाले नेपाल के सत्तारूढ़ दल सीपीएन-यूएमएल के सामने अपनी सरकार बचाना ही सबसे बड़ी चुनौती है. अल्पमत वाली सरकार के लिए खतरा बन रहे पार्टी के अंदरूनी मतभेदों को दूर करने के लिए दोनों विरोधी धड़ों से 10 सदस्यीय संयुक्त कार्यबल गठित किया गया है.
नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (एकीकृत मार्क्सवादी लेनिनवादी) के प्रमुख ओली ने रविवार को माधव कुमार नेपाल के साथ अकेले में बातचीत की थी और अंदरूनी मतभेदों को दूर करने के लिए दोनों धड़ों के पांच-पांच सदस्यों का एक कार्यबल बनाने का फैसला किया था. माधव कुमार नेपाल प्रतिद्वंद्वी धड़े के अग्रसर नेता हैं. माई रिपब्लिका न्यूज पोर्टल के अनुसार, इस कार्यबल की जिम्मेदारी पार्टी को 16 मई, 2018 के स्वरूप में लाने और सुलह कायम कराने की है. खबर के अनुसार, नेपाल के धड़े की अगुआई भीम बहादुर रावल करेंगे जबकि ओली धड़े का नेतृत्व संसदीय दल के उप नेता सुभाष चंद्र नेम्बांग करेंगे.
विश्वास मत जीतने की है चुनौती







