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लापरवाही: 6 माह पहले बताया था ऑक्सीजन का संकट, कमजोर रही निगरानी

राज्य

Updated Thu, 22 Apr 2021 11:29 IST

लापरवाही: 6 माह पहले बताया था ऑक्सीजन का संकट, कमजोर रही निगरानी

कोरोना की दूसरी लहर के बीच देश में ऑक्सीजन की कमी किसी से छिपी नहीं है। भले ही सरकारी दावे कुछ भी हों, लेकिन जमीनी हकीकत अस्पतालों में मिल रही है जो ऑक्सीजन के लिए जद्दोजहद में लगे हुए हैं। दिल्ली का ही उदाहरण लें तो मंगलवार रात आखिरी समय पर ऑक्सीजन पहुंचने से जीटीबी अस्पताल में 500 मरीजों की जान बच गई। डॉक्टर ऑक्सीजन देख भावुक हो उठे थे। यह स्थिति तब है जब छह माह पहले 'अमर उजाला' ने देश में ऑक्सीजन संकट का सबसे पहले खुलासा किया था।
 
13 दिसंबर 2020 को 'ऑक्सीजन की कमी से मरीजों की जान पर बनी आफत' शीर्षक से प्रकाशित खबर में मध्यप्रदेश सहित कई राज्यों की स्थिति से सरकार को रूबर कराया था। खबर प्रकाशित होने के चंद घंटे बाद ही केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन की निगरानी में बैठक शुरू हुई और तय हुआ कि ग्रीन कॉरिडोर की मदद से ऑक्सीजन पहुंचाई जाएगी।
 
इसके बाद उत्पादन भी बढ़ा। उस दौरान भी यह खुलासा किया था कि राज्य राजनीति के चलते ऑक्सीजन के आवागमन में एक दूसरे का सहयोग नहीं कर रहे हैं। इन मुद्दों पर सरकारों ने उचित संज्ञान भी लिया, लेकिन पहली लहर कमजोर पड़ने के साथ ही उनका ध्यान इस समस्या से हट गया और स्थिति गंभीर रूप में सामने आई।
 
ऑक्सीजन की कमी को लेकर स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण ने बताया कि देश में इस समय ऑक्सीजन का पूरा उत्पादन इस्तेमाल किया जा रहा है। यह प्रतिदिन 7,500 मीट्रिक टन तक बढ़ाई गई है, जिनमें से 6,700 मीट्रिक टन का इस्तेमाल चिकित्सीय क्षेत्र में हो रहा है।
 
 

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