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10 May, 2026
राज्य
Updated Fri, 14 May 2021 13:16 IST
नई दिल्ली: कोरोना से मुकाबले के लिए सरकार इस साल के अंत तक पूरी आबादी के टीकाकरण करना चाहती है. इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए तैयारियां भी शुरू हो गई हैं. नीति आयोग के सदस्य डॉ वीके पॉल ने बताया कि देश में दिसंबर तक सभी नागरिकों को टीका लगाने के लिए पर्याप्त वैक्सीन होगी. उन्होंने कहा कि अगस्त और दिसंबर के बीच के इन पांच महीनों में वैक्सीन की दो अरब से अधिक खुराक उपलब्ध कराई जाएंगी. जिसका अर्थ है कि प्रत्येक व्यक्ति का टीकाकरण आसानी से किया जा सकेगा.
एक तरफ जहां कोरोना महामारी के खतरे को देखते हुए लोगों से वैक्सीन लगवाने की बात कही जा रही है. वहीं, दूसरी तरफ कई राज्यों ने टीके की कमी की शिकायत की है. ऐसे में डॉ वीके पॉल का यह बयान एक उम्मीद जगाता है कि आने वाले कुछ महीनों में कोरोना वैक्सीन की किल्लत को दूर कर लिया जाएगा. डॉ. पॉल ने यह भी कहा कि अगले साल की पहली तिमाही तक वैक्सीन उत्पादन की संख्या तीन अरब तक पहुंचने की संभावना है.
नीति आयोग के सदस्य ने कहा कि भारत और देश के लोगों के लिए देश में पांच महीनों में दो अरब खुराक (216 करोड़) बनाई जाएंगी. जिसके तहत 55 करोड़ डोज कोवैक्सीन, 75 करोड़ कोविशील्ड, 30 करोड़ बायो ई सब युनिट वैक्सीन, 5 करोड़ जायडस कैंडिला डीएनए, 20 करोड़ नोवावैक्स, 10 करोड़ भारत बायोटेक नेजल वैक्सीन, 6 करोड़ जिनोवा, और स्पूतनिक V की 15 करोड़ डोज़ उपलब्ध होंगी.
फाइजर, मॉडर्न और जॉनसन एंड जॉनसन (Pfizer, Moderna and Johnson & Johnson) से टीकों की खरीद पर पॉल ने कहा कि सरकार जैव प्रौद्योगिकी विभाग और विदेश मंत्रालय के माध्यम से इन फर्मों के संपर्क में है. हमने उनसे औपचारिक रूप से पूछा कि वे भारत को खुराक भेजना चाहते हैं या यहां वैक्सीन का निर्माण करेंगे. डॉक्टर पॉल के मुताबिक, उन्होंने कहा है कि वे तीसरी तिमाही में टीके की उपलब्धता के बारे में बात करेंगे. हम मॉडर्न, फाइजर और जॉनसन के साथ इस प्रक्रिया में तेजी ला रहे हैं और उम्मीद हैं कि कंपनियां जल्द आगे आएंगी.
इस बीच, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि देश में अब तक 18 करोड़ के आसपास वैक्सीन लगाई जा चुकी हैं. गुरुवार को 18-44 आयु वर्ग के 4,37,192 लाभार्थियों को COVID वैक्सीन की पहली डोज दी गई. गौरतलब है कि दिल्ली, महाराष्ट्र सहित कई राज्यों ने केंद्र के सामने टीकों की कमी का मुद्दा उठाया है. टीके की कमी के बाद कुछ राज्यों में वैक्सीनेशन सेंटरों को बंद भी करना पड़ा है. हालांकि, केंद्र सरकार वैक्सीन की कमी को पूरी तरह स्वीकार नहीं कर रही है.







