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Updated Sat, 26 Feb 2022 21:15 IST
मणिपुर के ड्रग माफियाओं के खिलाफ अभियान के लिए चर्चित पूर्व पुलिस अधिकारी थौनाओजम बृंदा अपने राज्य को नशा मुक्त, भ्रष्टाचार मुक्त बनाने की अपनी लड़ाई जारी रखने के वास्ते राजनीतिक मैदान में उतर गई हैं. चार साल पहले, बृंदा उस वक्त सुर्खियों में आई थीं जब उन्होंने कई ड्रग-कार्टेल का भंडाफोड़ किया था और वीरता के लिए पुलिस पदक से सम्मानित हुईं थीं. उन्होंने मणिपुर विधानसभा के लिए 27 फरवरी और तीन मार्च को दो चरणों में होने वाले चुनाव में इंफाल पूर्वी जिले के याइसकुल निर्वाचन क्षेत्र से जनता दल (यूनाइटेड) के उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ने की घोषणा करके हलचल मचा दी है.
वर्ष 2021 में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक पद से इस्तीफा देने वाली बृंदा ने बताया कि चुनावी राजनीति में उनके प्रवेश की मुख्य वजह राज्य और उसके युवाओं को भ्रष्टाचार और नशीली दवाओं (दुर्व्यवहार) के ‘आतंकवाद’ से मुक्ति की तात्कालिकता है. उन्होंने हालांकि अपने करियर के शुरुआती वर्षों में राजनीति में शामिल होने के बारे में कभी नहीं सोचा था, लेकिन न केवल उनके क्षेत्र से, बल्कि पूरे राज्य से समर्थन मिलने के कारण चुनावी राजनीति में आने का फैसला किया.
थौनाओजम बृंदा को अलग प्रत्याशी के तौर पर देखा जा रहा है. उनके ससुर ने राज्य के खिलाफ एक सशस्त्र आंदोलन का नेतृत्व किया, लेकिन उन्होंने मादक पदार्थों के खिलाफ धर्मयुद्ध में एक उत्कृष्ट अधिकारी के रूप में मणिपुर पुलिस की सेवा की. उन्होंने मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह के साथ अनबन के बाद पुलिस बल छोड़ दिया, जिस पर उन्होंने एक ड्रग लॉर्ड की मदद करने का आरोप लगाया था. अब, वह जद (यू) के टिकट पर भाजपा के मौजूदा विधायक और मणिपुर के वर्तमान कानून मंत्री थोकचोम सत्यब्रत सिंह के खिलाफ चुनाव लड़ रही हैं.
बृंदा 2012 बैच की मणिपुर पुलिस सेवा कैडर की अधिकारी थीं. वह जून 2018 में एक मादक पदार्थों की हाई प्रोफाइल खेप पकड़ने के बाद सार्वजनिक तौर पर सुर्खियों में आई थी. उनके नेतृत्व में चलाये गये अभियान में चंदेल स्वायत्त जिला परिषद के तत्कालीन अध्यक्ष लुखोसी ज़ू और सात अन्य लोगों को गिरफ्तार किया गया था.
उसके बाद मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह ने उन्हें मादक पदार्थ और नकदी जब्त करने के मामले में उनके सराहनीय प्रयास को लेकर उन्हें पुलिस पदक से सम्मानित किया था. हालांकि, जब ज़ू और छह अन्य को विशेष नारकोटिक्स ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस (एनडीपीएस) अदालत ने बरी कर दिया, तो उन्होंने दिसंबर 2020 में विरोधस्वरूप पुरस्कार वापस कर दिया था.







