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10 May, 2026
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Updated Sat, 15 May 2021 22:47 IST
पिछले साल जुलाई के समय अंतरिक्ष अनुंधान की दुनिया में अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा (NASA) अपना पर्सिविरेंस रोवर मंगल पर भेजने की तैयारी में लगा था. इसी बीच चीन (China) ने अपने तियानवान-1 अभियान मंगल (Mars) के लिए प्रक्षेपित कर दिया. जबकि उससे पहले नासा पर्सिवियरेंस रोवर को प्रक्षेपण टाल चुका था. तब माना जा रहा था कि चीन ने यह कदम अंतरिक्ष प्रतिस्पर्धा में खुद को अमेरिका के समकक्ष बताने के लिए जल्दी उठाया है. अब चीन के उस अभियान का ज्यूरोग रोवर मंगल पर उतरा है जबकि तीन महीने पहले ही अमेरिकी रोवर मंगल पर उतर चुका है. ऐसे में यह समझना जरूरी है कि आखिर यह चीन की कितनी बड़ी उपलब्धि है.
पहली बार ऑर्बिटर, लैंडर और रोवर एक साथ
चीन की नेशनल स्पेस एजेंसी (CNSA) का यान तियानवान-1 इस साल फरवरी से मंगल का चक्कर लगा रहा था. अब उसका लैंडर मंगल के यूटोपिया प्लैनिटा नाम के एक विशाल मैदान पर उतरा है जो मंगल के उत्तरी गोलार्द्ध में स्थित है. इस तरह से चीन अब दुनिया का एकमात्र देश बन गया है जिसने किसी ग्रह या उपग्रह पर ऑर्बिटर, लैंडर और रोवर एक साथ सफलतापूर्वक भेज दिया है.
चीन के लिए बड़ा ऐतिहासिक कदम
चीनी स्टेट मीडिया सीसीटीवी के मुताबिक तियानवान अभियान ने किसी दूसरे ग्रह पर पहली लैंडिंग की है और चीन के अंतरिक्ष इतिहास में एक बड़ी उपलब्धि है. लैंडर ने चीन के आग के देवता के नाम वाले ज्यूरोंग रोवर उतार चीन को मंगल पर रोवर उतारने वाला दुनिया का दूसरा देश बना दिया है.
कितनी खास है यह उपलब्धि
चीन की यह उपलब्धि कई लिहाज से खास है. यह उसके उस महत्वाकांक्षा के लिए बड़ी सफलता है जिसके तहत वह खुद को अंतरिक्ष के क्षेत्र में अमेरिका और रूस के समकक्ष खड़ा करना चाहता है. इससे उसे अब दूरगामी अभियानों को आगे बढ़ाने का विश्वास मिलेगा और इससे वह मंगल पर अमेरिका के एकछत्र राज को पनपने से रोक सकता है.
नासा की मंगल उपलब्धियों के आगे कुछ नहीं
लेकिन चीन की यह उपलब्धि मंगल के लिहाज से नासा की तुलना में बड़ी नहीं है. नासा ने सबसे पहले यूटोपिया प्लैनिटा पर 1976 में वाइकिंग-दो उतारा था जहां उसके कुछ महीने पहले ही वाइकिंग-एक मंगल पर उतरने वाला पहला अन्वेषण यान था. इससे पहले अमेरिका के कई यान और रोवर मंगल पर उतर चुके हैं और हाल में उतरा पर्सिवियरेंस रोवर कई तरह के ऐसे प्रयोग कर रहा है जो भविष्य में मंगल के मानव अभियानों के लिए काम आएंगे.
तो अंतरिक्ष स्पर्धा में चीन
लेकिन चीन ने अंतरिक्ष स्पर्धा के साथ मंगल स्पर्धा में अपने उपस्थिति जरूर दर्ज की है जो कम महत्वपूर्ण नहीं हैं. चीन पहले भी दुनिया के अभियानों से हटकर काम कर चुका है. चंद्रमा के पिछले हिस्से में यान भेजना, वहां से मिट्टी के नमूने लाना, खुद का इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन बनाने की शुरुआत ऐसे कई काम हैं जो मंगल को अंतरिक्ष स्पर्धा में नजरअंदाज नहीं किए जा सकने वाला देश बना चुके हैं.
नासा से बहुत पीछे माना जा रहा था चीन
हाल ही में चीन के लॉन्ग मार्च 5बी रॉकेट का अनियंत्रित मलबा हिंद महासागर में गिरना चीन और अमेरिका के बीच तनातनी का मौका बन गया था. अब मंगल पर रोवर उतारने से चीनी सरकार को अपने लोगों का समर्थन मिलेगा. वहीं चीन की इस सफलता को नासा के वैज्ञानिक भी अहम मान रहे हैं. चीन नासा से पिछले चार दशकों से पीछे था, खासतौर पर लैंडिंग के मामले में.
लेकिन अब बदला नजरिया







