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जम्मू-कश्मीर: पद्मश्री कवयित्री पद्मा सचदेव के गीत पल्ला सिपाइया...पर खूब झूमते थे डोगरा सैनिक

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Updated Thu, 5 Aug 2021 12:06 IST

जम्मू-कश्मीर: पद्मश्री कवयित्री पद्मा सचदेव के गीत पल्ला सिपाइया...पर खूब झूमते थे डोगरा सैनिक

पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित डोगरी भाषा की पहली आधुनिक कवयित्री पद्मा सचदेव का बुधवार को 81 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। तबियत बिगड़ने के बाद उन्हें मंगलवार शाम को मुंबई के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया था। जम्मू के पुरमंडल इलाके में संस्कृत के प्रोफेसर जय देव बादु के घर में 1940 में पदमा सचदेव का जन्म हुआ। उनके भाई अभी भी यहीं रहते हैं जबकि वह मुंबई में रह रही थीं। 
 
 
सचदेव ने 1973 में आयी हिंदी फिल्म प्रेम पर्वत के लिए मेरा छोटा सा घर गीत भी लिखा। उन्होंने 1978 में आयी हिंदी फिल्म आंखों देखी के लिए भी दो गीत लिखे। जिसमें मोहम्मद रफी और सुलक्षणा पंडित द्वारा गाया मशहूर गीत सोना रे, तुझे कैसे मिलूं भी शामिल है। उन्होंने ऑल इंडिया रेडिया, जम्मू और मुंबई में काम किया और गायक सुरिंदर सिंह से शादी करने के बाद नई दिल्ली तथा मुंबई को अपना घर बना लिया। जम्मू कश्मीर कला, संस्कृति एवं भाषा अकादमी के अतिरिक्त सचिव अरविंदर सिंह अमन ने इसे अपूर्णीय क्षति बताया है। कहा कि उन्हें डोगरी को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल कराने के संघर्ष में अहम भूमिका के लिए भी याद रखा जाएगा।
 
 
हिंदी और डोगरी साहित्य में पद्मा सचदेव का अतुलनीय योगदान रहा है। उनके इस प्रयास को हमेशा याद रखा जाएगा। -मनोज सिन्हा, उप-राज्यपाल   
 
 
लता ने लिखा निशब्द हूं  
 
 
सचदेव के निधन पर लता मंगेशकर ने शोक जताते हुए ट्वीट संदेश में यादें उजागर की। उन्होंने लिखा कि मेरी प्यारी स


हेली और मशहूर लेखिका, कवयित्री, और संगीतकार पद्मा सचदेव के स्वर्गवास की खबर सुनकर निशब्द हूं। हमारी बहुत पुरानी दोस्ती थी। पद्मा और उनके पति हमारे परिवार के सदस्य जैसे थे। मैंने उसके आग्रह पर डोगरी गाना गाया थो जो बहुत लोकप्रिय हुआ था। पद्मा के पति सुरेंद्र सिंह अच्छे शास्त्रीय गायक है। कई यादें हैं आज में बहुत दुखी हूं ईश्वर पद्मा की आत्मा को शांति प्रदान करे।
 
 
डोगरी भाषी समुदाय को भारी नुकसान
 

पूर्व सांसद डॉ. कर्ण सिंह ने प्रख्यात डोगरी कवि पद्मा सचदेव के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए कहा कि पद्मा सचदेव के निधन से देश ने एक प्रमुख साहित्यकार खो दिया। उनके निधन से डोगरा भाषी समुदाय को भारी क्षति हुई है। कई दशकों में डोगरी साहित्य में पद्मा जी का योगदान अद्वितीय था और उनकी कविताओं को लाखों डोगरी भाषी लंबे समय तक याद रखेंगे। खराब स्वास्थ्य से जूझने के बावजूद, पद्मा जी एक सकारात्मक और रचनात्मक शख्सियत बनी रहीं। मैंने वास्तव में उनकी कई कविताओं का अंग्रेजी में अनुवाद किया है।
 
 
पद्मा सचदेव के गीत पल्ला सिपाइया...पर खूब झूमते थे डोगरा सैनिक
 
 
पल्ला सिपाइया डोगरेया, रोसलियां रोसिलयां धारा, तेरा बड़ा मंदा लगदा डोगरी गीत से पद्मा सचदेव ने जम्मू-कश्मीर के बाहर डोगरी को पहचान दिलवाई। यह वह डोगरी गाना है, जिस पर जम्मू में तैनात सैनिक लाउडस्पीकर लगाकर नाचते थे। आज जब इस गाने को बनाने वाली कवयित्री पद्मश्री पद्मा सचदेव नहीं रहीं, तो पूर्व सैनिकों की जुबां पर भी एक ही शब्द है, तेरा बड़ा मंदा लगदा। 
 
 
यह गाना किशन समैलपुरी ने लिखा था। पद्मा सचदेव ने उस समय की सबसे मशहूर गायिका लता मंगेशकर से यह गाना गवाया था। इसके लिए लता मंगेशकर ने डोगरी सीखी थी। उस समय लता मंगेशकर और पद्मा सचदेव की काफी बनती थी। सेना से सेवानिवृत्त पूर्व मेजर जनरल गोवर्धन सिंह जमवाल ने पद्मा सचदेव के गाने पल्ला सिपाइया को फौजियों के लिए प्यार बताया। उन्होंने बताया कि उस समय डोगरा सैनिक किस कदर इस गाने पर झूमते थे। गोवर्धन जमवाल का कहना है कि उस समय वह सेना की 36 ब्रिगेड के कमांडिंग अफसर थे। बसंतर से जम्मू तवी के सभी सीमांत गांवों में जब उन्होंने दौरा किया, तब देखा कि इन गांवों में रहने वाले लोग और डोगरा सैनिक लाउडस्पीकर लगाकर उनके गाने पर झूमते थे। इसका जिक्र जब उन्होंने पद्मा सचदेव से किया तो पद्मा ने कहा कि वह इन गांवों में जाकर यह नजारा देखना चाहती हैं। डोगरा सैनिकों के सम्मान और उनके अंदर यह गाना जोश भरता था। बता दें कि इस गाने में एक शादीशुदा औरत के दिल के भाव हैं, जो पहाड़ों में रहती है। उसका पति फौजी है और वह अलग-अलग ऋतुओं को देखकर उसे घर बुुलाती है।
 
 
पद्मा सचदेव के निधन पर शोक व्यक्त किया 
 
 
पूर्व सांसद डॉ. कर्ण सिंह ने प्रख्यात डोगरी कवि पद्मा सचदेव के निधन पर शोक व्यक्त किया। कहा कि पद्मा सचदेव के निधन से देश ने एक प्रमुख साहित्यकार खो दिया है और डोगरा भाषी समुदाय को भारी क्षति हुई है। कई दशकों में डोगरी साहित्य में पद्मा जी का योगदान अद्वितीय था और उनकी कविताओं को लाखों डोगरी भाषी लंबे समय तक याद रखेंगे। खराब स्वास्थ्य से जूझने के बावजूद, पद्मा जी एक सकारात्मक और रचनात्मक शख्सियत बनी रहीं। मैंने वास्तव में उनकी कई कविताओं का अंग्रेजी में अनुवाद किया है।
 
 
डोगरी भाषा में पद्मा सचदेव का योगदान सराहनीय 
 
 
जम्मू। मॉरीशस में इंडिया गांधी सेंटर के निदेशक बलवंत ठाकुर ने आईजीसीआईसी फीनिक्स के सेमिनार हॉल में डोगरी साहित्यिक पद्मा सचदेव के निधन पर शोक व्यक्त किया। कहा कि पद्मा सचदेव डोगरी और हिंदी के सबसे प्रसिद्ध और अलंकृत लेखकों में से एक थीं। डोगरी भाषा और साहित्य के विकास के में उनका योगदान बड़ा अहम था।
 
 
 

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