Sun,
10 May, 2026
ताज़ा खबरें
Updated Tue, 3 Aug 2021 16:19 IST
नई दिल्ली. हैदराबाद मुठभेड़ मामले (Hyderabad Encounter) में सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने मामले की जांच कर रहे न्यायिक आयोग का आखिरी बार कार्यकाल बढ़ा दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने आयोग को इस मामले की जांच पूरी करने के लिए 6 महीने और दिए हैं. चीफ जस्टिस एनवी रमन्ना ने कहा कि ये समय तीसरी बार बढ़ाया गया है ऐसे में अब और विस्तार नहीं दिया जाएगा. सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज जस्टिस वीएस सिरपुरकर का आयोग जांच कर रहा है. आयोग ने कोविड के चलते और समय मांगा था. जनवरी 2021 में सुप्रीम कोर्ट ने हैदराबाद मुठभेड़ मामले की जांच कर रहे आयोग का कार्यकाल 6 महीने के लिए और बढ़ा दिया था. जस्टिस वीएस सिरपुरकर की अध्यक्षता वाला यह आयोग हैदराबाद में एक पशु चिकित्सक के साथ गैंगरेप और हत्या के चार आरोपियों की मुठभेड़ में मारे जाने की घटना की जांच कर रहा है. तीन सदस्यीय आयोग ने जांच पूरा करने के लिए सुप्रीम कोर्ट से समय बढ़ाने का आग्रह किया था.
12 दिसंबर 2019 को देश की सुप्रीम कोर्ट ने इस घटना की जांच के लिए तीन सदस्यीय आयोग नियुक्त किया था. सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि जांच आयोग उसे छह महीने के भीतर इस मामले की अपनी फाइनल रिपोर्ट सौंपे. इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने मामले में तेलंगाना हाईकोर्ट और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग में लंबित कार्यवाही पर भी रोक लगा दी थी. साथ ही SIT से पूरी रिपोर्ट तलब कर ली थी. सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी कहा था कि कोई भी दूसरा प्राधिकारी इस मामले में कोई भी जांच तब तक नहीं करेगा जब तक कि आयोग अपनी रिपोर्ट नहीं दे देता.
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी आदेश दिया था कि तीन सदस्यीय आयोग को केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल सुरक्षा मुहैया कराएगा. हालांकि आयोग तय समय के भीतर अपनी रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में नहीं प्रस्तुत कर सका था. इसके बाद आयोग ने पिछले साल 12 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट से हैदराबाद एनकाउंटर मामले में अंतिम जांच रिपोर्ट सौंपने के लिए और छह महीने का वक्त दिए जाने की गुहार लगाई थी जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने 6 महीने का और समय दे दिया था. आयोग में बॉम्बे हाईकोर्ट की पूर्व जज रेखा सोंदूर बल्दोटा और पूर्व सीबीआई निदेशक डीआर कार्तिकेयन भी शामिल हैं. इससे पहले सुप्रीम कोर्ट को सूचित किया गया था कि जांच आयोग कोरोना महामारी एवं अन्य अपरिहार्य कारणों से अपनी अंतिम जांच रिपोर्ट को सुपुर्द करने में असमर्थ रहा है. ऐसा दूसरी बार हुआ है जब जांच आयोग के कार्यकाल को बढ़ाया गया.







