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Ganesh Katha: जब गणेश जी ने कुबेर के धन को साबित कर दिया 'तुच्छ', टूट गया घमंड

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Updated Wed, 8 Dec 2021 13:49 IST

Ganesh Katha: जब गणेश जी ने कुबेर के धन को साबित कर दिया 'तुच्छ', टूट गया घमंड

आज बुधवार का दिन विघ्नहर्ता श्रीगणेश जी का दिन है. आज आपको गणेश जी की एक कथा के बारे में बताता हूं. जब सोने की लंका और धन के मद में चूर कुबेर स्वयं को सबसे अधिक धनवान दिखाने के लिए गणेश जी को आमंत्रित करते हैं, तो गणपति उनके घमंड को कुछ समय में ही तोड़ देते हैं और उनके पूरे धन संपत्ति को तुच्छ साबित कर देते हैं. आइए पढ़ते हैं गणेश जी की यह कथा:

ब्रह्मा जी के आशीर्वाद से गंधर्व कुबेर के पास सबसे अधिक धन और स्वर्ण था. इसके प्रदर्शन के लिए उन्होंने सोने की लंका बनवाई, जिसे बाद में उनके सौतेले भाई रावण ने हड़प लिया था. सोने की लंका बनवाने के बाद कुबेर अपने धन का प्रदर्शन करना चाहते थे. इसके लिए उन्होंने शिव जी को लंका में आमंत्रित करने का सोचा. वे कैलाश पहुंच गए, लेकिन महादेव शिव शंकर तो ध्यान में लीन थे. थोड़ देर बाद उनकी आंखें खुली तो वे कुबेर को देखकर उनके मन की बात जान गए.

कुबेर ने महादेव को प्रणाम किया और सोने की लंका में भोजन के लिए आमंत्रित किया. भगवान शिव​ ने कहा कि वे तो नहीं जा पाएंगे, लेकिन उनके छोटे पुत्र गणेश जी जरुर जाएंगे. कुबेर ने तय ति​थि पर विभिन्न प्रकार के भोजन बनवाए. उधर गणेश जी भी मूषक पर सवार होकर लंका पहुंच गए. कुबेर को लगा कि सोने की लंका और धन संपदा देखकर गणेश जी बहुत प्रभावित होंगे और कैलाश पर इसका चर्चा करेंगे.

कुबेर ने गणेश जी का सत्कार किया, फिर लंका भ्रमण का प्रस्ताव रखा, तो गणेश जी ने कहा कि वे तो यहां भोजन के निमंत्रण पर आए हैं, न कि लंका भ्रमण के लिए. उन्होंने कुबरे से कहा कि आप भोजन का प्रबंध करें. कुबेर ने तुरंत भोजन लगवाया और गणेश जी आसन पर विराजमान हो गए.

गणेश जी को भोजन अतिप्रिय है. वे जब तक माता पार्वती के हाथों एक निवाला नहीं खाते तब तक उनका पेट नहीं भरता. कुबेर ने गणेश जी के समक्ष 56 प्रकार के व्यंजन परोसे. गणेश जी पलभर में सारा भोजन चट कर गए. कुबेर ने अपने सभी रसोइयों को खाना बनाने और खिलाने पर लगा दिया. एक ओर खाना आता और पलभर में गणेश जी सारा खाना खा जाते.

देखते-देखते ही थोड़े समय में गणेश जी कुबेर के महल का सारा भोजन और अन्न खा गए. कुछ कथाओं में तो यह भी बताया गया है, कि गणेश जी इतने भूखे थे कि वे कुबेर के स्वर्ण भंडार को भी खा गए. अंत में कुबेर हाथ जोड़कर गणपति के सामने खड़े हो गए और बोले कि अब उनके पास खिलाने के लिए कुछ भी शेष नहीं है.

इस पर गणेश जी ने कहा कि इतना धन ​किस काम का जब आप उनको भोजन ही न करा सके। इस बात को सुनकर कुबेर बहुत लज्जित हो गए. यह सारा दृश्य देखकर त्रिदेव मुस्कुराने लगे और गणेश जी कैलाश लौट आए. इस तरह से गणेश जी ने कुबेर के घमंड को चूर कर दिया.

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