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11 May, 2026
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Updated Tue, 27 Apr 2021 16:55 IST
नई दिल्ली। भारत में कोरोना वायरस के पीक को लेकर आईआईटी के वैज्ञानिकों ने नया दावा किया है। वैज्ञानिकों ने अनुमान लगाया है कि मई के मध्य तक कोरोना की दूसरी लहर का पीक आ सकता है। अब उन्होंने अपने पूर्वानुमान में संशोधन करते हुए एक गणितीय मॉडल के आधार पर कहा है कि भारत में कोविड-19 की दूसरी लहर के दौरान सक्रिय मामलों की संख्या 14 से 18 मई के बीच चरम पर पहुंचकर 38 से 48 लाख हो सकती है।
इतना ही नहीं, चार से आठ मई के बीच संक्रमण के दैनिक मामलों की संख्या 4.4 लाख तक के आंकड़े को छू सकती है। भारत में सोमवार को संक्रमण के 3,52,991 नए मामले सामने आए तथा महामारी से 2,812 और लोगों ने दम तोड़ दिया। इसके साथ ही देश में सक्रिय मरीजों की संख्या 28,13,658 हो गई।
आईआईटी कानपुर और हैदराबाद के वैज्ञानिकों ने सूत्र नाम के मॉडल का इस्तेमाल करते हुए कहा कि मई के मध्य तक उपचाराधीन मामलों की संख्या में 10 लाख से अधिक तक की वृद्धि हो सकती है। नए पूर्वानुमान में समयसीमा और मामलों की संख्या में सुधार किया गया है। पिछले सप्ताह शोधकर्ताओं ने पूर्वानुमान व्यक्त किया था कि महामारी 11 से 15 मई के बीच चरम पर पहुंच सकती है और उपचाराधीन मामलों की संख्या 33-35 लाख तक हो सकती है तथा मई के अंत तक इसमें तेजी से कमी आएगी।
इस महीने के शुरू में, वैज्ञानिकों ने पूर्वानुमान व्यक्त किया था कि देश में 15 अप्रैल तक उपचाराधीन मामलों की संख्या चरम पर होगी, लेकिन यह बात सच साबित नहीं हुई। आईआईटी-कानपुर में कंप्यूटर विज्ञान एवं अभियांत्रिकी विभाग के प्रोफेसर मनिंदर अग्रवाल ने कहा कि इस बार, मैंने पूर्वानुमान आंकड़े के लिए न्यूनतम और अधिकतम गणना भी की है। मुझे विश्वास है कि वास्तविक आंकड़ा न्यूनतम और अधिकतम आंकड़े के बीच होगा। अग्रवाल ने रविवार को उपचाराधीन मामलों और नए मामलों के चरम पर पहुंचने के पूवार्नुमान संबंधी नए आंकड़े ट्विटर पर साझा किए।
अग्रवाल ने यह भी उल्लेख किया कि यह स्पष्ट नहीं है कि अंतिम आंकड़ा क्या होगा। अभी यह अध्ययन रिपोर्ट प्रकाशित नहीं हुई है। वैज्ञानिकों ने कहा कि सूत्र मॉडल में कई विशिष्टताएं हैं। गौतम मेनन और हरियाणा स्थित अशोका विश्वविद्यालय की उनकी टीम ने एक स्वतंत्र गणना में पूर्वानुमान व्यक्त किया था कि कोविड-19 की मौजूदा लहर मध्य अप्रैल से मध्य मई तक के बीच अपने चरम पर पहुंच सकती है। मेनन ने यह भी आगाह किया कि कोविड-19 से संबंधित इस तरह के पूर्वानुमानों पर केवल अल्पकालिक अवधि में ही विश्वास किया जाना चाहिए।







