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कोवाक्सिन दोहरे म्यूटेंट पर भी असरदार

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Updated Thu, 22 Apr 2021 11:05 IST

कोवाक्सिन दोहरे म्यूटेंट पर भी असरदार

कोरोना के दोहरे म्यूटेंट पर भी देश का पहला स्वदेशी टीका कारगर है। आईसीएमआर और पुणे स्थित नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ वॉयरोलॉजी (एनआईवी) के वैज्ञानिकों ने एक अध्ययन में यह खुलासा किया है जिसे 28 जनवरी को अमर उजाला ने सबसे पहले प्रकाशित किया था।
 
इस अध्ययन के लिए वैज्ञानिकों ने यूके, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका से भारत आए अलग-अलग म्यूटेंट वायरस को पहले आइसोलेट किया था और फिर हैदराबाद स्थित भारत बायोटेक फॉर्मा कंपनी की कोवाक्सिन के साथ परीक्षण किया था।
 
इस दौरान यह पता चला कि कोवाक्सिन की दो डोज लेने के बाद अगर कोई व्यक्ति म्यूटेंट वायरस से भी संपर्क में आकर संक्रमित होता है तब भी उसकी हालत गंभीर अवस्था में नहीं रहेगी। हालांकि, वैक्सीन लगने के बाद चेहरे पर मास्क, सोशल डिस्टैसिंग और बार-बार हाथ धोना अनिवार्य है।
 
 
वैज्ञानिक प्रक्रिया के जरिए सैंपल से जीवित स्वरूपों को पृथक किया और फिर उस कोवाक्सिन के साथ अध्ययन शुरू किया। आईसीएमआर ने तीन अलग-अलग अध्ययन किए जिनमें ये यूके वैरिएंट के परिणाम इसी साल 27 जनवरी को जर्नल ऑफ ट्रेवल मेडिसिन में प्रकाशित हुए।
 
जबकि ब्राजील वैरिएंट पर अध्ययन के आधार पर आईसीएमआर ने अब दोहरे म्यूटेंट पर कोवाक्सिन असरदार होने का दावा किया है। हालांकि इस दोहरे म्यूटेंट को लेकर किए अध्ययन के परिणाम अभी तक सार्वजनिक नहीं किए गए हैं।
 
 
आईसीएमआर के मुख्य महामारी रोग विशेषज्ञ डॉ. समीरन पांडा का कहना है कि वायरस के नए-नए म्यूटेंशन को लेकर बहुत बड़ी कामयाबी हमारे हाथ लगी है। इससे हमें संक्रमण की आगामी लहर से बचाव में मदद मिल सकती है।
 
 
साथ ही अब यह भी स्पष्ट हो गया है कि नए स्वरूप की वजह से टीकाकरण प्रभावित नहीं होगा। ज्यादा से ज्यादा लोग वैक्सीन लेकर कोरोना महामारी से अपना बचाव कर सकते हैं। इससे सीधेतौर पर राहत हमें हर दिन होने वाली मौतों कमी के रूप में दिखाई देंगी।
 
 
कोरोना से बचाव के लिए कोवाक्सिन को लेकर बड़ी कामयाबी मिली है। हैदराबाद स्थित भारत के परीक्षण परिणाम सार्वजनिक किए हैं जिसमें कोवाक्सिन 78 फीसदी तक असरदार मिली है। कंपनी के अनुसार यह वैक्सीन काफी असरदार है। 
 
 
इसकी दो डोज लेने के बाद शरीर में बनने वालीं एंटीबॉडी 100 फीसदी को संक्रमण की गंभीर स्थिति से बचाव करती है। साथ ही अस्पताल में मरीज के रुकने की अवधि भी कम होती है।
 
 
वैक्सीन के जरिए शरीर में विकसित एंटीबॉडी संक्रमण को हावी होने से बचाएगा। कंपनी ने बताया कि अगर कोई वैक्सीन 98 फीसदी तक असरदार हो तो इसका मतलब यह है कि संक्रमण होने के बाद 98 फीसदी तक बीमारी का प्रभाव कम हो सकता है।
 
 
देश की दूसरी स्वदेशी वैक्सीन अब तीसरे परीक्षण में प्रवेश कर चुकी है। यह वैक्सीन भारत सरकार के डीबीटी विभाग और फार्मा कंपनी बॉयरोलॉजिकल ई के साथ मिलकर तैयार की गई है।
 
 
बॉयोललॉजिक ई कंपनी के पास उत्पादन की काफी बड़ी क्षमता है। यह कंपनी एक महीने में सात से आठ करोड़ डोज का उत्पादन कर सकती है। इसलिए आगामी दिनों में देश को टीकाकरण को लेकर बड़ा सहयोग प्राप्त हो सकता है। 
 
 
बुधवार को नीति आयोग के सदस्य डॉ. वीके पॉल ने बताया कि अभी तक देश में कोवाक्सिन, कोविशील्ड और स्पूतनिक वी को इस्तेमाल की अनुमति दी गई है। देश के दूसरे स्वदेशी को डीबीटी के वैज्ञानिकों ने मिलकर तैयार किया है। 
 
 
अभी तक इस टीके का परीक्षण जानवरों में पूरा किया जा चुका है। इंसानों में पहला और दूसरे चरण का परीक्षण पूरा कर लिया है। अभी इन दिनों चरण के परिणामों पर अध्ययन चल रहा है जल्द यह तीसरे चरण का परीक्षण भी शुरू कर देगा।
 
 
डॉ. पॉल ने बताया कि टीका लगने के बाद भी अगर कोई संक्रमित हो रहा है तो वह गंभीर स्थिति की ओर नहीं बढ़ता है। यह सभी देशों में देखने को मिला है। इसके बाकायदा सुबूत भी हैं। इसलिए लोगों को वैक्सीन पर भ्रम नहीं होना चाहिए।
 
 
 

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