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11 May, 2026
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Updated Tue, 20 Apr 2021 12:03 IST
कानपुर। कोरोना वायरस ने नाक, कान, गला, फेफड़ा, दिल के बाद अब दिमाग पर भी हमला करना शुरू कर दिया है। हैलट अस्पताल के न्यूरो साइंस कोविड अस्पताल में अब तक इस तरह के तीन रोगी आ चुके हैं। उनके दिमाग पर संक्रमण का असर हुआ। मरीजों के चेहरे, गाल, होंठ पर झनझनाहट का असर हुआ, जबकि हाथ-पैरों में ऐंठन जैसे लक्षण मिले। डॉक्टरों ने उनका सीटी स्कैन कराया, तब समस्या पता चली। तीनों रोगियों की उम्र 40 साल से कम हैं। कुछ रोगियों में पेशाब ज्यादा आने की समस्या मिली है। उनमें ङ्क्षसड्रोम ऑफ इनअप्रोप्रिएट एंटीड्यूरेटिक हार्माेन सिक्रेशन (एसआइएडीएच) पाया गया। इसकी वजह से ब्रेन (दिमाग) से एंटीड्यूरेटिकहार्माेन ज्यादा मात्रा में उत्सर्जित होने लगता है। अस्पताल के विशेषज्ञों ने लोगों को ऐसे लक्षण दिखने पर कोरोना जांच अवश्य कराने को कहा है, साथ ही मरीजों पर शोध करने की तैयारी भी की है।
न्यूरो साइंस कोविड अस्पताल के नोडल अधिकारी प्रो. प्रेम सिंह के मुताबिक कोरोना का वायरस खून में मिलकर दिमाग तक पहुंच रहा है। यह दिमाग की महीन सी झिल्ली को तोड़कर नसों तक पहुंचने में कामयाब होने लगा है। वायरस के नसों तक पहुंचते ही रोगी को स्ट्रोक, फेसियल न्यूरोपैथी, भूलने की बीमारी जैसे लक्षण होने लगता है। फेसियल न्यूरोपैथी में रोगी को चेहरे के आंशिक लकवे की समस्या हो जाती है। यह समस्या युवाओं में ज्यादा मिल रही है। डॉक्टरों टीम इस विषय पर शोध के लिए जुट गई है। आइआइटी के विशेषज्ञों से भी मदद ली जा सकती है।
अब तक दो मामले आए सामने
ऐसे करें बचाव
डॉ. सिंह का कहना है कि मास्क लगाकर शारीरिक दूरी के नियमों का पालन करना चाहिए। अगर ऐसा कोई लक्षण हो तो तत्काल जांच कराकर इलाज कराना चाहिए।
आइसीयू की मशीनों से परेशानी: इंसेटिव केयर यूनिट (आइसीयू) में वेंटीलेटर समेत कई तरह के मशीनों के मॉनीटर लगाए गए हैं, जिनसे कुछ कुछ देर के अंतराल में आवाज आती रहती है। कुछ मरीजों को यह आवाज परेशान कर रही है। उनकी एकाग्रता नहीं बन रही हे। नींद न आने जैसी दिक्कतें हो रही हैं। कुछ मरीजों को रात में सोते समय सांस उखडऩे जैसा डर बना है। डॉक्टर, जूनियर डॉक्टर और अन्य पैरामेडिकल स्टाफ ऐसे रोगियों की काउंसिङ्क्षलग कर रहे हैं।







