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10 May, 2026
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Updated Sun, 21 Nov 2021 20:00 IST
नई दिल्ली: कन्फेडरेशन ऑफ इंडिया ट्रेडर्स यानि कैट (CAIT) ने एक हैरान करने वाला बयान दिया है. कैट ने दिग्गज ई-कॉमर्स कंपनी अमेजन (Amazon) पर एक गंभीर आरोप लगाया है. कैट ने अपने एक बयान में कहा कि अमेजन की वेबसाइट से गांजा, मारिजुआना जैसे पदार्थों की बिक्री कोई पहला और नया अपराध नहीं है. कैट ने बताया कि 2019 में हुए पुलवामा आतंकी हमले (Pulwama attack) में आतंकियों ने जिस रसायन (Chemicals) का प्रयोग बम बनाने के लिए किया था उसे भी अमेजन की वेबसाइट से खरीदा गया था. इसी रसायन का प्रयोग करके आतंकियों ने इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस तैयार किए थे.
गौरतलब है कि 2019 पुलवामा हमले में 40 सीआरपीएफ जवानों की मौत हो गई थी. इस हमले की जांच कर रही राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने अपने रिपोर्ट में इस बात का खुलासा किया था. अमेजन ने आतंकियों द्वारा खरीदे रसायन की डिटेल को भी जांच एजेंसियों के साथ शेयर किया था. बाद में अमेजन की मदद से ही जांज एजेंसियों ने दो आतंकियों को गिरफ्तार भी किया था. आतंकियों ने अमेजन से अमोनियम नाइट्रेट, जो भारत में एक प्रतिबंधित पदार्थ है उसकी खरीदारी की थी.
गिरफ्तार आतंकियों ने कबूली थी बात
CAIT के राष्ट्रीय अध्यक्ष बीसी भरतिया और महासचिव प्रवीण खंडेलवाल ने कहा कि एनआईए की तरफ से गिरफ्तार व्यक्तियों से जब पूछताछ की गई थी तो उन्होंने इस बात को स्वीकार किया था कि हमले की वारदात को अंजाम देने के लिए अमेजन से आईईडी, बैटरी और अन्य सामान को खरीदा था. फोरेंसिक जांच में सामने आया था कि हमले में अमोनियम नाइट्रेट, नाइट्रोग्लिसरीन का प्रयोग बम बनाने में किया गया.
प्रतिबंधित सामान मिल रहा है अमेजन पर
CAIT ने कहा कि चूंकि हमारे सैनिकों के खिलाफ आतंकियों ने प्रतिबंधित सामाग्री अमोनियम नाइट्रेट को बड़ी आसानी से ऑनलाइन माध्यम से खरीद लिया और इस प्रतिबंधित पदार्थ का प्रयोग देश के खिलाफ किया गया इसलिए इसे बचने वाले प्लेटफॉर्म अमेजन पर देश द्रोह का मामला दर्ज किया जाना चाहिए. कैट ने कहा कि ई-कॉमर्स वेबसाइट को इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि वह कैसे किसी को भी कुछ भी खरीदने की अनुमति दे सकता है.
बयान में कहा गया कि इससे ज्यादा यह आश्चर्य की बात है कि इतने बड़े मामले को पूरी तरह से मृत कर दिया गया और ऐसे पदार्थों की बिक्री के लिए इसमें आगे किसी भी तरह की कार्रवाई नहीं की गई.
दिल्ली, वाराणसी, मालेगांव ब्लास्ट में भी हुआ प्रयोग
भरतिया और खंडेलवाल ने कहा कि विस्फोटक अधिनियम 1984 के तहत अमोनियम नाइट्रेट को 2011 में प्रतिबंधित कर दिया गया था. इसके साथ ही भारत में इसकी खुली बिक्री, खरीद, निर्माण पर प्रतिबंध लगाने के लिए एक अधिसूचना भी जारी की गई थी. कैट के अनुसार मुंबई से पहले अमोनियम नाइट्रेट का इस्तेमाल 2006 में वाराणसी और मालेगांव में और 2008 में दिल्ली में हुए सीरियल ब्लास्ट में हुआ था.
कैट ने केस दर्ज करने की उठाई मांग
सुरेश सोंथालिया ने अपने बयान में कहा कि कैट 2016 से ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के लिए एक संहिताबद्ध कानून और नियमों की मांग कर रहा है, लेकिन अभी तक इस दिशा में किसी भी प्रकार के ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं. उन्होंने कहा कि नियम और कानून न होने की वजह से ऑनलाइन व्यापार तेजी से विषाक्त होता जा रहा है. उन्होंने कहा कि इससे ज्यादा क्या खराब हो सकता है कि इन वेबसाइट्स पर बम बनाने और हमारे सैनिकों की जान लेने के सामान की बिक्री की जा रही है. इनके जिम्मेदार लोगों पर केस दर्ज करके मुकदमा चलाया जाना चाहिए.







