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10 May, 2026
राज्य
Updated Mon, 10 May 2021 20:05 IST
नई दिल्ली। वित्त मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि 2021-22 के बजट में 'राज्यों को अंतरण' शीर्षक के तहत टीकाकरण के लिए आवंटित 35,000 करोड़ रुपये की राशि का केंद्र द्वारा कोरोना के टीके के लिए इस्तेमाल करने पर कोई रोक नहीं है। अप्रैल से शुरू चालू वित्त वर्ष के लिए अनुदान मांगों की संख्या 40 में प्रशासनिक सुविधाओं की दृष्टि से राज्यों को अंतरण शीर्षक के तहत 35,000 करोड़ रुपये का प्रविधान किया गया है। एक राशि के इस्तेमाल में यह सुविधा दी गई है कि इस पर व्यय के तिमाही नियंत्रण वाले प्रतिबंध लागू नहीं होते हैं। इससे यह भी फायदा है कि केंद्र टीके खरीदकर उन्हें राज्यों को अनुदान के रूप दे सकता है।
वित्त मंत्रालय ने ऐसी रिपोर्टो को खारिज किया कि केंद्र सरकार ने कोरोना के टीकाकरण के लिए कोई प्रविधान नहीं किया है। मंत्रालय ने कहा है कि वास्तव में टीकों की खरीद और उसके लिए भुगतान केंद्र द्वारा इसी खाते (राज्यों को अंतरण के तहत अनुदान मांग संख्या 40) से किया जा रहा है।
मंत्रालय ने कहा कि टीका खर्च केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की केंद्र प्रायोजित सामान्य योजनाओं से हटकर एक बारगी खर्च है इसके लिए अलग धन रखा जाना इसकी बेहतर निगरानी और प्रबंधन में सहायक है। टीकाकरण मद में उपलब्ध कराई गई राशि को स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा परिचालन में लाया जाता है। टीका खरीद कर उसे राज्यों को अनुदान के तौर पर उपलब्ध कराया जाता है जबकि टीके का वास्तविक प्रबंधन राज्यों द्वारा किया जाता है।
मंत्रालय ने कहा कि योजना की प्रकृति में बदलाव लाने के लिए प्रशासनिक स्तर पर काफी लचीलापन रखा गया है। इसके तहत वस्तु अथवा दूसरे रूप में अनुदान किया जा सकता है। राज्यों को स्थानांतरण मद में रखी गई मांग का मतलब यह कतई नहीं कि केंद्र सरकार इसे खर्च नहीं कर सकती।
वर्तमान में 45 साल से अधिक आयु के लोगों को कोरोना का टीका केंद्र सरकार द्वारा मुफ्त उपलब्ध कराया जा रहा है। इसके साथ ही डाक्टरों, नर्सो, स्वास्थ्य कíमयों, सुरक्षा बलों, पुलिस के जवानों जैसे अग्रिम पंक्ति के कार्मिकों को भी केंद्र सरकार ने मुफ्त टीका लगवाया है। केंद्र सरकार अब तक विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को टीके की 17.56 करोड़ डोज उपलब्ध करा चुकी है।
केंद्र सरकार ने कोविशील्ड टीका बनाने वाली कंपनी सीरम इंस्टीट्यूट आफ इंडिया को अब तक कुल 26.60 करोड़ डोज के लिए 3,639.67 करोड़ रुपये का आर्डर दिया है। वहीं कोवैक्सीन बनाने वाली कंपनी भारत बायोटेक को आठ करोड़ डोज के लिए 1,104.78 करोड़ रुपये का आर्डर दिया है।







