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क्या अंतरिक्ष पर्यटन से पृथ्वी पर आ सकते हैं ‘एलियन रोगाणु’

नौकरियां

Updated Sun, 21 Nov 2021 21:24 IST

क्या अंतरिक्ष पर्यटन से पृथ्वी पर आ सकते हैं ‘एलियन रोगाणु’

पिछले दो सालों में दुनिया में कोविड-19 महामारी से दुनिया को जिस तरह से जूझना पड़ा,ऐसे में एक बड़ी चिंता यही थी कि तमाम वैज्ञानिक और चिकित्सकीय उन्नति के बाद भी हमारी मानव जाति वायरस जैसे खतरनाक जीवों (Dangerous Organisms) से निपटने के लिए तैयार क्यों नहीं है. ऐसे हालात में क्या हम मंगल ग्रह तक जाने और अंतरिक्ष पर्यटन (Space Tourism) की दिशा में कदम बढ़ाने में जल्दबाजी नहीं कर रहे हैं. क्योंकि हम इंसान भी अंतरिक्ष में सूक्ष्मजी व ले जाते हैं जहां पर उनमें तेजी से म्यूटेशन हो सकता है जो उन्हें खतरनाक बना सकता है. इसलिए जैवसुरक्षा (Biosecurity) पर काम करना बहुत जरूरी कहा जा रहा है.

जैवसुरक्षा उपाय को जरूरत का समय
हाल में भले ही मंगल ग्रह के अभियानों की सक्रियता ज्यादा रही है, लेकिन अभी इंसान के तो मंगल ग्रह तक जाने में समय है. लेकिन व्यवसायिक अंतरिक्ष पर्यटन शुरू हो चुका है. 85 से ज्यादा कंपनियां या संगठन भविष्य में अंतरग्रहीय पर्यटन पर काम कर रहे हैं. लेकिन कई वैज्ञानिकों का कहना है पृथ्वी से बाहर यातायात शुरू करने से पहले दुनिया को कुछ जरूरी जैवसुरक्षा उपाय कर लेना जाहिए.

यह है अंदेशा
इन वैज्ञानिकों को डर है कि हम अंतरिक्ष से अनजाने और एलियन जीव, खासतौर पर सूक्ष्म जीव पृथ्वी पर पहुंचा सकते हैं जिनसे निपटने के लिए हम अभी तक तैयार नहीं हैं. यदि ऐसे जीव पृथ्वी पर आ गए, जिनका आना दूसरे तरीकों से संभव नहीं है, तो पृथ्वी का संतुलन तक बिगड़ सकता है.

ऐसा होना बहुत ही मुश्किल
जानकारों का कहना है कि ऐसा होने की संभावना नहीं के बराबर है क्यों कि अभी तक पृथ्वी के बाहर, खासतौर पर उसके आसपास, किसी तरह के जीवन का पता नहीं चला है. लेकिन कुछ लोगों को लगता है कि यह मान कर नहीं चला जा सकता और इसके लिए हमें तैयारी करनी ही चाहिए.

लेकिन यह तो हुआ ही है ना
संभावना इस बाद की भी कम नहीं हैं कि कोई मानव अंतरिक्ष पर्यटक वहां से पृथ्वी के जीव को ले जाएं और यह भी अपने आप में एक बड़ा जोखिम साबित हो सकता है. अंतरिक्ष में हुए प्रयोगों से साफ पता चला है कि वहां पहुंचे  सूक्ष्मजीवों में तेजी से जीन म्यूटेशन होता है. सूक्ष्मगुरुत्व हालात में एशरीकिया कोली की हजारों पीढ़ियों को विकिसत करने के बाद शोधकर्ताओं ने पाया है कि एक ऐसा बैक्टीरिया विकसित हुआ है जो प्रतिस्पर्धी तौर पर और ज्यादा तेज से विकसित हुआ है जिसमें बहुत ज्यादा एंटीबायोटिक प्रतिरोध पाया गया है.

जैवसुरक्षा प्रंबंधन की जरूरत
अगर वह स्ट्रेन ही पृथ्वी पर वापल लाया गया होता या लाया जाए तो वह पृथ्वी के मानव जीवन के लिए गंभीर खतरा हो सकता है. ऑस्ट्रेलिया के एडिलेड यूनिवर्सिटी के इनवेजन जीवविज्ञानी फिल कैसे का कहना है कि ऐसे जोखिमों के हालों की संभाव्यता कम है, लेकिन उनकी क्षमता चरम नतीजे देने की होती है और यही जैवसुरक्षा प्रंबंधन का मुख्य कार्य है क्योंकि जब हालात बिगड़ते हैं तो बिगड़ते ही चले जाते हैं.

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आक्रमण जीवविज्ञानियों की जरूरत
अंतरिक्ष अनुसंधान पर अंतरराष्ट्रीय समितित  (COSPAR) ने ग्रह सुरक्षा पर एक पैनल  बनाया है, लेकिन फिलहाल इसके किसी भी सदस्य की इनवेजन विज्ञान पर विशेषज्ञता नहीं है. ऑस्ट्रेलिया के आक्रमण जीवविज्ञानी सोचते हैं कि यह एक गंभीर अनदेखी है. उनका कहना है कि हमें और परीष्कृत नियमों की जरूरत होगी जिससे पृथ्वी के बाहर के वातावरणों से आने वाले जैवसंक्रमण को रोक सकें और साथ ही यहां भी संक्रमण को बाहर जाने से रोक सकें.

अंतरराष्ट्रीय नियमों पर काम
बायोसाइंस में प्रकाशित इस अध्ययन में जीवविज्ञानियों ने लिखा है कि आक्रमणकारी प्रजातियों पर विज्ञान और शोध पर बहुत गहन जानकारी होने के बाद वे अनुशंसा करते हैं कि आक्रमण जीवविज्ञानियों और खगोलजीवविज्ञानियों को ज्यादा संयोजन के साथ काम करना चाहिए जिससे कि पृथ्वी और उसके बाहर के लिए ग्रह जीव सुरक्षा संबंथी अंतरराष्ट्रीय नियमों पर काम करना जाहिए.

फिलहाल जीवसुरक्षा नियम या प्रोटोकॉल हमें नाकाम कर रहे हैं, जैसे जब 2019 में चंद्रमा पर इजराइली अंतरिक्ष यान टकराकर नष्ट हुआ था, तब वहां की सतह पर टार्डिग्रेड चले गए थे हो सकता है कि वे अब भी वहां जीवित हो सकते हैं. अंतरिक्ष पर्यटन में भी यात्रियों के जरिए ऐसे सूक्ष्म जीव अंतरिक्ष में पहुंच सकते हैं जो वहां पर म्यूटेट होकर बहुत खतरनाक बन सकते हैं. ऐसे में हमें जैवसुरक्षा पर गहराई से काम करने की जरूरत है.

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