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एम्स के निदेशक रणदीप गुलेरिया ने कोरोना पर मानी यह बात- प्रेस रिव्यू

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Updated Sat, 1 May 2021 19:28 IST

एम्स के निदेशक रणदीप गुलेरिया ने कोरोना पर मानी यह बात- प्रेस रिव्यू

देश के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल एम्स के निदेशक रणदीप गुलेरिया ने कहा है कि कोरोना महामारी के कारण देश की स्वास्थ्य व्यवस्था पर पड़ रहे जबर्दस्त दबाव के कारण मरीज़ों के लिए अस्पताल में बेड का इंतज़ार करना देश में अधिक मौतों की एक वजह हो सकती है.

 

गुलेरिया ने कहा कि देश में बीते नौ दिनों से लगातार संक्रमण के तीन लाख से अधिक मामले दर्ज किए जा रहे हैं.

 

उन्होंने कहा, "स्थिति से निपटने के लिए हम ट्राइगेजिंग नाम की एक रणनीति पर काम कर रहे हैं. जैसे कि अगर किसी मरीज़ की स्थिति बेहतर है और उसे ऑक्सीजन सिलिंडर की ज़रूरत नहीं है तो उसे बिना ऑक्सीजन वाले बेड में शिफ्ट किया जाए और उसे निगरानी में रखा जाए. अस्पताल को दो हिस्सों में बाँटा जाए, पहला उन मरीज़ों के लिए जिन्हें अधिक मात्रा में ऑक्सीजन की ज़रूरत है और दूसरा उन मरीज़ों के लिए जिन्हें कम ऑक्सीजन की ज़रूरत है."

उन्होंने कहा, "आज से पहले ट्राइगेजिंग जैसी रणनीति की ज़रूरत नहीं पड़ी लेकिन अब ये अहम होता जा रहा है. महामारी की पहली लहर में संक्रमितों की संख्या में धीरे-धीरे इज़ाफा हुआ लेकिन दूसरी लहर में जैसे संक्रमितों की संख्या में रॉकेट की तेज़ी से उछाल आया है. इस कारण स्वास्थ्य व्यवस्था पर इसका जबर्दस्त दवाब पड़ा रहा है. तेज़ी से मामले बढ़ रहे हैं जिस कारण संसाधनों की कमी हो रही है."

उन्होंने कहा कि देश में मौतों के आँकड़े बढ़ने की दो या तीन वजहें हो सकती हैं.

 

उन्होंने कहा कि "अगर मौतों की संख्या अधिक है और मौतों का प्रतिशत कम है तो स्थिति को समझने के लिए हमें और आँकड़ों की ज़रूरत होगी. दूसरा ये कि हाल में आए कुछ आँकड़े ये इशारा कर रहे हैं कि शायद वायरस के ब्रिटिश वेरिएंट के कारण अधिक संख्या में मौतें हो रही हैं. ये संभव है कि ये वेरिएंट अधिक संक्रामक होने के साथ-साथ अधिक मौतों के लिए भी ज़िम्मेदार हों."

 

अब तक की मीडिया रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि कोरोना वायरस के भारतीय वेरिएंट के कारण देश में अधिक मौतें हो रही हैं. हालांकि अब तक विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भारतीय वेरिएंट के अधिक घातक होने की पुष्टि नहीं की है.

तीसरा कारण उन्होंने ये बताया कि "संक्रमण के मामलों में तेज़ी से आए उछाल के कारण स्वास्थ्य व्यवस्था पर दबाव पड़ा है. एसे में कई मरीज़ों को बेड नहीं मिल रहा और वो घरों में इलाज करा रहे हैं. ये मरीज़ जब तक अस्पताल पहुंचते हैं उनकी हालत गंभीर हो चुकी होती है. इस कारण भी मौतों के आँकड़े बढ़ सकते हैं."

 
 
 

 

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