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फेफड़ों में 60 प्रतिशत संक्रमण, बगल में 87 साल की मां, योग-वर्जिश कर भगाया कोरोना

राज्य

Updated Thu, 29 Apr 2021 17:25 IST

फेफड़ों में 60 प्रतिशत संक्रमण, बगल में 87 साल की मां, योग-वर्जिश कर भगाया कोरोना

इंदौर। फेफड़ों में 60 प्रतिशत संक्रमण होने के बाद भी विजयनगर थाना टीआइ तहजीब काजी ने पांचवें दिन कोरोना को मात दे दी। टीआइ की 87 वर्षीय मां भी कोरोना से लड़ रही थी। अस्पताल में बेड न मिलने पर काजी ने मां को खुद का बेड दे दिया और वह सोफे में रात गुजारने लगे। काजी को पॉवर योगा और वर्जिश करता देख मां खुद को स्वस्थ महसूस करने लगी और दोनों पांचवें दिन घर पहुंच गए।

 

पुलिस थाना की सरकारी गाड़ी चलाने वाला ड्राइवर वीरसिंह सबसे पहले संक्रमित हुआ था। इसके बाद कुछ सिपाही,हवलदार और नगर सुरक्षा समित‍ि सदस्य संक्रमित होते गए। हालांकि काजी को एसे कोई संकेत नजर नहीं आए और लगातार ड्यूटी करते रहे।

एक दिन शरीर में थकान महसूस होने पर काजी ने डॉक्टर की सलाह सिटी स्कैन करवाया तो पता चला फेफड़े 60 प्रतिशत संक्रमित हो गए। डॉक्टर ने कहा इलाज में थोड़ी सी देरी घातक साबित हो सकती है। काजी तत्काल निजी अस्पातल में भर्ती हो गए और रेमडेसिविर इंजेक्शन लगवाना शुरु कर दिए।

दूसरे ही दिन उनकी मां, भाई सहित परिवार के 8 सदस्यों में भी कोरोना की पुष्टि हो गई। काजी के मुताबिक उस वक्त अस्पतालों में मारा-मारी का दौर था और कहीं भी बेड उपलब्ध नहीं हो रहे थे। मैंने डॉक्टरों से गुजारिश की और मां को उनके साथ रख लिया। जिस बेड पर मैं था वो मां को दे दिया और स्वयंं सोफे पर शिफ्ट होगया।

उनका कहना था कोरोना शरीर पर तो हावी हो गया लेकिन मन पर हावी नहीं होने दिया। मैं रोज सुबह उठता और पॉवर योगा करता। वर्जिश करने का उपकरण मंगवा लिया और नियमत रुप से एक घंटा व्यायाम करता था। मां के लिए दवाईं गोलियां या कोई सामान लेने जाना हो तो सातवीं मंजिल तक पैदल ही आना जाना करता था। अंततः पांचवे दिन डॉक्टरों ने मां-बेटे को डिस्चार्ज कर घर भेज दिया।

काजी के मुताबिक मेरे बारे में चुनिंदा लोगो को ही पता था कि मैं कोरोना के कारण अस्पताल में भर्ती हूं। क्योंकि मैंं अस्पताल में भी मोबाइल पर सक्रिय था व लोगों से सतत संपर्क में था। परिवार के सदस्यों की रोजाना काउंसलिंग करता था। परिचितों के मदद से लिए रोजाना कॉल आते थे तो उनकी हर संभव मदद करता था। उन्हें दवायां मुहैया करवाने से लेकर अस्पताल की व्यवस्था भी करता था।

काजी के अनुसार अस्पताल से घर आने के बाद मैंने स्टाफ से कहा कि कोरोना के साथ जीना सीख लें। अब यह समझें कि‍ वह हमारे साथ ही रहेगा। बस जरुरत है सावधानी की। मुझे लगता है नियमित खान-पान और योगा,वर्जिश से रोगप्रतिरोधक क्षमता बढ़ाकर ही हम कोरोना को हरा सकते हैं।

काजी के मुताबिक ड्यूटी के दौरान एक कचरा गाड़ी और ऑटो रिक्शा में टक्कर होने का मामला सामने आया था. जिस गाड़ी ने रिक्शा को टक्कर मारी उसमें अस्पतालों से निकला वेस्ट भरा हुआ था.मुझे लगता है उसी वक्त कोरोना की चपेट में आया था।

 

 

 


 

 

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