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कामगार व श्रमिकों की आर्थिक- सामाजिक सुरक्षा को लेकर योगी सरकार

कामगार व श्रमिकों की आर्थिक- सामाजिक सुरक्षा को लेकर योगी सरकार

प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार कामगार तथा श्रमिकों के हितों को लेकर बेहद गंभीर है। सरकार ने अब उनकी आर्थिक तथा सामाजिक सुरक्षा को लेकर आयोग का गठन किया है। इस आयोग को आज लोकभवन में कैबिनेट की बैठक में मंजूरी प्रदान की गई।

कैबिनेट बैठक में उत्तर प्रदेश कामगार और श्रमिक (सेवायोजन एवं रोजगार) आयोग के गठन के साथ ही आधा दर्जन प्रस्तावों को कैबिनेट की बैठक में मंजूरी प्रदान की गई। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में कैबिनेट की बैठक में श्रमिक- कामगार कल्याण आयोग के गठन को हरी झंडी दी गई। इस आयोग का अध्यक्ष सीएम योगी आदित्यनाथ की ओर से नामित कैबिनेट मंत्री होंगे। इसके गठन के बाद से प्रदेश में अब श्रमिकों की आॢथक एवं सामाजिक सुरक्षा पहले से ज्यादा सुदृढ़ होगी। इससे प्रदेश के अंदर ही कौशल विकास के माध्यम से रोजगार का अवसर उपलब्ध होगा। श्रमिकों को अपने ही जिले में काम मिलेगा। प्रदेश की अर्थव्यवस्था को भी गति मिलेगी। कामगारों एवं श्रमिकों के सामाजिक एवं आॢथक सुरक्षा के साथ उनके विकास में इस आयोग की महत्वपूर्ण भूमिका होगी।

इस उच्च स्तरीय प्रशासकीय संस्था के अध्यक्ष मुख्यमंत्री या उनके द्वारा नामित कोई कैबिनेट मंत्री होगा। श्रम एवं सेवा योजन विभाग के मंत्री संयोजक, मंत्री औद्योगिक विकास एवं मंत्री सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम और निर्यात प्रोत्साहन ब्यूरो उपाध्यक्ष होंगे। अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास आयुक्त सदस्य सचिव होंगे। इसके अलावा कृषि, ग्राम्य विकास मंत्री, कृषि उत्पादन आयुक्त, प्रमुख सचिव श्रम एवं सेवायोजन, मुख्यमंत्री के ओर से नामित औद्योगिक एवं श्रमिक संगठनों के प्रतिनिधि, उनकी ओर से ही नामित उद्योगों के विकास एवं श्रमिकों के हित में रुचि रखने वाले पांच जनप्रतिनिधि और विशेष आमंत्रित इसके सदस्य होंगे।

यह आयोग श्रमिकों और इकाईयों के बीच फैसिलेटर की भूमिका में होगा। यह आयोग श्रमिकों और उद्योगों के बीच कड़ी का काम करेगा। इस क्रम में वह मांग के अनुसार संबंधित इकाईयों को दक्ष श्रमिक मुहैया कराएगा। साथ ही इंडस्ट्री की मांग के अनुसार दक्षता बढ़ाने के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम भी आयोग चलाएगा। इसके तहत प्रशिक्षण का यह अवसर औद्योगिक इकाईयों में अप्ररेंटिसशिप के रूप में भी मिलेगा। अन्य राज्यों और देशों से श्रमिकों की जो मांग होगी उसमें भी आयोग फैसिलेटर की भूमिका निभाएगा। किसी भी जगह समायोजित होने वाले श्रमिक को न्यूनतम बुनियादी सुविधाएं (आवास, सामाजिक सुरक्षा, बीमा आदि) भी आयोग मुहैया कराएगा।

अपने मकसद के अनुसार आयोग काम करे इसकी निगरानी के लिए औद्योगिक विकास आयुक्त की अध्यक्षता में एक बोर्ड या कार्यपरिषद भी गठित होगी। इसमें एपीसी सह-अध्यक्ष, प्रमुख सचिव अपर मुख्य सचिव आईआईडीसी, कृषि विभाग, पंचायती राज, लोक निर्माण, सिंचाई, नगर विकास, ग्राम्य विकास, एमएसएमई, उद्योग एवं खाद्य प्रसंस्करण, कौशल विकास सदस्य और समाज कल्याण श्रम एवं सेवायोजन सदस्य सचिव होंगे। आयोग और राज्य स्तरीय बोर्ड की मंशा के अनुसार काम हो रहा है, उसकी निगरानी के लिए सभी जिलों में डीएम की अध्यक्षता में जिला स्तरीय समिति भी होगी। इसमें मुख्य विकास अधिकारी अपाध्यक्ष, जिला रोजगार सहायता अधिकारी नोडल अधिकारी सदस्य होंगे। इसके अलावा परियोजना निदेशक ग्राम्य विकास, अपर मुख्य अधिकारी पंचायत, जिला उद्यान अधिकारी, उप निदेशक कृषि, उपायुक्त उद्योग, उपायुक्त एनआरएलएम, परियोजना निदेशक सूडा, जिला खादी ग्रामोद्योग अधिकारी, जिला विद्यालय निरीक्षक, अपर उप सहायक श्रमायुक्त जिला स्तरीय श्रम प्रवर्तन अधिकारी इसके सदस्य होंगे।

इस आयोग की बैठक हर माह होगी। इसी क्रम में बोर्ड की बैठक हर 15 दिन में और जिला स्तरीय समिति की बैठक हफ्ते में एक बार होगी। डीएम हर बैठक की रिपोर्ट से प्रदेश स्तरीय बोर्ड को अवगत कराएंगे।

UPDATE BY : ANKITA

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