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कोरोना जैसे वैश्विक महामारी को देखते हुए वाराणसी का रथयात्रा मेला स्थगित।

वाराणसी/ब्यूरो रिपोर्ट : वैश्विक महामारी का रूप ले चुका कोरोना संक्रमण धर्म और आध्यात्म की नगरी काशी के व्रत और त्योहारों पर लगातार ग्रहण लगा रहा है। गंगा दशहरा के बाद आज निर्जला एकादशी पर जहाँ काशी के घाट सूने रहें वहीँ इस वर्ष काशी के प्रसिद्द जगन्‍नाथ रथयात्रा मेले की 218 वर्ष पुरानी परम्परा पर भी संकट के बादल मंडरा रहे हैं। आयोजकों ने इसे स्थगित करने का फैसला ले लि‍या है।

रथयात्रा मेला स्थगित
पुरी पुराधिपति भगवान् जगन्‍नाथ ऐसे देवता हैं जो भक्तो के बीच पहुंचकर सड़क पर दरबार लगाते हैं। इस वर्ष से 5 जून को भगवान जगन्‍नाथ का पारंपरि‍क स्‍नान होगा, जि‍से परंपरागत रूप से मंदि‍र के पुजारी ही नि‍भाएंगे और इसमें श्रद्धालुओं के आने की अनुमति‍ नहीं होगी। इसके बाद भगवान बीमार होते हैं और 14 दि‍न तक एकांत में रहकर काढ़ा ग्रहण करते हैं। इसके उपरांत 21, 22 और 23 जून को होने वाले रथयात्रा मेले से सम्बंधित समस्त आयोजनों को स्थगित कर दिया गया है। ये वही तीन दि‍न होते थे जब पुरी पुराधिपति भगवान जगन्‍नाथ काशी की जनता को दर्शन देते थे।

लोगों के स्वास्थ्य के लिए लिया गया फैसला
श्री जगन्नाथ ट्रस्ट के अध्यक्ष दीपक शापुरी ने बताया कि कोरोना महामारी को देखते हुए इस वर्ष जगन्नाथ रथयात्रा को स्थगित किया गया है। आम जनमानस के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए आयोजन स्थगन का निर्णय लिया गया है। उन्होंने बताया कि 5 जून को होने वाले भगवान् जगन्‍नाथ के स्नान में श्रद्धालुओं के आने की अनुमति नहीं होगी। इस कार्य को मंदिर के पुजारी ही निर्वाह करेंगे। इसके अलावा तीन दिवसीय रथयात्रा मेला पूरी तरह स्थगित रहेगा।

1780 में पुरी जगन्नाथ मंदिर के मुख्य पुजारी ने बनवाया था मंदिर
अध्यक्ष दीपक शापुरी ने बताया कि काशी अकेला स्थान है जहां भगवान् जगन्‍नाथ तीन दिनों तक सड़क पर अपने भक्तों को दर्शन देते हैं। काशी के अस्सी क्षेत्र में साल 1780 में पुरी जगन्नाथ मंदिर के के मुख्य पुजारी व प्रबंधक पंडित नित्यानंद काशी आये थे। उसी समय अस्सी में ही पुरी की छवि वाला काष्ठ का विग्रह स्थापित करवाया था। इसके अलावा पुरी की परम्परा के अनुसार यहाँ देवोपम रथ भी बनवाया। साल 1802 से काशी में रथयात्रा मेले का आयोजन निरंतर हो रहा है।

साल भर मिलता है पुरी जैसा पुण्य
दीपक शापुरी ने बताया कि ओडि‍शा राज्‍य के पुरी में स्थापित हि‍न्‍दुओं के पवि‍त्र चार धाम में से एक भगवान जगन्‍नाथ मंदिर में दर्शन से जो पुण्य मिलता है वही पुण्य काशी के इस मंदिर में दर्शन करने मात्र से साल भर मिलता है। उन्होंने बताया कि सभी देवताओं का गर्भगृह मंदिर के केंद्र में होता है और उन्हें हटाया नहीं जाता पर भगवान् जगन्नाथ साल भर में तीन दिन के लिए भ्रमण पर निकलते हैं और भक्तों को दर्शन देते हैं।

काशी के लक्‍खी मेला में शुमार है रथयात्रा का मेला
रथयात्रा का मेला काशी के लक्‍खी मेलों में शुमार है। तीन दि‍न तक चलने वाले इस मेले में लाखों की संख्‍या में काशीवासी उमड़ते हैं। इस दौरान सड़क के कि‍नारे नानखटाई मि‍ठाई की डि‍मांड सबसे ज्‍यादा होती है। मगर अफसोस की इस बार कोरोना वायरस के चलते काशी का ये लक्‍खी मेला नहीं मनाया जाएगा।

वाराणसी से अभिषेक दुबे शिवम की रिपोर्ट

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