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अफगान भारत की दोस्ती से डरा पाकिस्तान

अमेरिका और तालिबान के बीच हुए शांति समझौते में भारत की मौजूदगी पाकिस्‍तान को खल रही है। पाकिस्‍तान को लग रहा है कि अबतक उसके इशारे पर हिंसा फहलाने वाला तालिबान कहीं शांत ना पड़ जाए और भारत की सरकार अफगानिस्‍तान में शांति बहाल करने में सफल ना हो जाए। जिस तरह से पाकिस्‍तान की तालिबान से दोस्‍ती है, उसी तरह से अफगानिस्‍तान और भारत के रिश्‍ते काफी मजबूत है जिनसे हमारा पड़ोसी देश परेशान है। इसके साथ ही पाकिस्‍तान को यह भी डर सता रहा है कि आने वाले दिनों में भारत अपनी फौज को अफगानिस्‍तान में सुरक्षा बहाली के लिए लगा सकता है।

जानकारी के अनुसार, अफगानिस्‍तान से अमेरिकी फौज वापस आने के बाद भारत वहां पर बहुत बड़ी भूमिका निभा सकता है। पाकिस्‍तान को डर है कि अगर भारत वहां की सरकार के साथ मिलकर तालिबान से कोई समझौता कर दे तो उसकी आतंकवाद फैलाने की योजना खटाई में पड़ सकती है। इसकी को लेकर पाकिस्तानी मीडिया में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने सीनेट में अमेरिका और तालिबान के बीच हुए समझौते पर बात रखते हुए कहा कि इस समझौते में पाकिस्तान की भूमिका महज संबंध पक्षों को एक-दूसरे के पास लाने की रही, लेकिन वह अफगानिस्तान में भारत की कोई सुरक्षा भूमिका नहीं देखना चाहता।

कुरैशी ने कहा हम अफगानिस्तान में भारत की कोई सुरक्षा भूमिका नहीं चाहते। इस बारे में हमारी चिंता की वजह इतिहास में है। अफगानिस्तान में पाकिस्तान विरोधी गतिविधियां जारी हैं जो हमारे लिए एक चुनौती है।” हालांकि हमेशा की तरह इस बार भी उन्‍होंने शांति का ड्रामा करते हुए कहा, ”पाकिस्तान, अफगानिस्तान में शांति चाहता है, क्योंकि वहां पर कोई और अस्थिरता पाकिस्तान के लिए आव्रजकों की बाढ़ की नई समस्या पैदा कर सकती है, जहां पहले से ही लाखों अफगान नागरिक शरण लिए हुए हैं।

अफगानिस्तान की मौजूदा सरकार से भारत के रिश्ते बहुत अच्छे हैं। अफगानिस्तान में आतंकवाद को भड़काने के मुद्दे पर अफगान सरकार और पाकिस्तान सरकार में तल्खी बनी रहती है। इसी के साथ अफगान सरकार और भारत सरकार के अच्छे संबंध भी पाकिस्तान को चुभते हैं, जिसे लगता है कि अफगानिस्तान में भारत का प्रभाव बढ़ गया है।

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