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कानपूर-पुलिस से अधिक तैयार था हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे

कानपूर-पुलिस से अधिक तैयार था हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे

कानपुर में अपहरण तथा हत्या के प्रयास के मामले में 25 हजार के ईनामी हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे को पकड़ने के लिए तैयारी के साथ दबिश डालने गई पुलिस की टीम से अधिक तैयारी बदमाश की टीम की थी। चौबेपुर थाना क्षेत्र में बदमाशों ने पुलिस की तीन टीमों को तीन तरफ से घेरकर ताबड़तोड़ फायरिंग की। इनमें एक डिप्टी एसपी के साथ तीन दारोगा तथा चार सिपाही शहीद हो गए। सात घायलों में से चार की हालत गंभीर है।

कानपुर के ही राहुल तिवारी नाम के व्यक्ति ने इसके खिलाफ एक मामला दर्ज कराया था। हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे के खिलाफ राहुल तिवारी ने अपहरण तथा हत्या के प्रयास का मामला दर्ज कराया था। इस केस दर्ज होने के 24 घंटा बाद ही पुलिस की टीम ने विकास दुबे पर शिकंजा कसने की तैयारी कर ली। तीन थाना की फोर्स के साथ सीओ बिल्हौर देवेंद्र मिश्र ने बीती देर रात विकास दुबे के घर पर दबिश दी। कानपुर के सीओ बिल्हौर देवेंद्र मिश्रा के नेतृत्व में बिठूर, चौबेपुर, शिवराजपुर थानों की संयुक्त पुलिस टीमें अपराधी विकास दुबे को पकडऩे के लिए उसके गांव विकरु पहुची और घेराबंदी करते हुए बदमाश की गिरफ्तारी के लिए जाल बिछाया। इस बीच पुलिस के गांव में आने की भनक अपराधियों को लग गई।

कानपुर जिले के चौबेपुर थाना में विकास दुबे के गांव विकरु में इसकी तैयारी पुलिस से काफी बेहतर थी। सीओ बिल्हौर देवेंद्र मिश्रा के नेतृत्व में बिठूर, चौबेपुर, शिवराजपुर थानों की संयुक्त पुलिस टीमें विकास दुबे को पकडऩे के लिए उसके गांव पहुंची और घेराबंदी करते हुए बदमाश की गिरफ्तारी के लिए जाल बिछाया। इससे पहले ही विकास दुबे की टीम ने सड़क पर जेसीबी मशीन लगाकर रास्ता रोका दिया था। पुलिस की टीमें जैसे ही गाडिय़ों ने बाहर निकलीं तो तीन तरफ छतों ने उनके ऊपर ताबड़तोड़ फायरिंग होने लगी।

घटनाक्रम में पुलिस पर भी सवाल उठ रहे हैं कि आखिर कैसे पहले से ही विकास दुबे को पुलिस की दबिश की सूचना मिल गई। पूरा घटनाक्रम इस ओर इशारा कर रहा है कि जैसे विकास दुबे को पुलिस की दबिश की पूरी जानकारी थी। उसने किसी भी हद तक जाने की तैयारी कर रखी थी। देर रात जब पुलिस की टीमें उसके घर पहुंच गईं और उसके बचने का कोई रास्ता न निकला तो उसने जघन्य हत्याकांड को अंजाम दे दिया। सड़क पर रास्ता रोककर लगाई गई जेसीबी भी रेड की पूर्व सूचना होने की तस्दीक कर रही है।

माना जा रहा है कि हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे को दबिश की जानकारी मिल गयी थी और वह अपनी टीम के साथ घात लगाए बैठा था। जैसे ही पुलिस क्षेत्र में घुसी, उनपर अंधाधुंध फायरिंग कर दी गयी। देखते ही देखते पुलिसकॢमयों की लाशें बिछ गयीं। जिस तरीके से बदमाशों ने पुलिस पर हमला किया, उससे इस बात का पता चलता है कि बदमाशों को पुलिस दबिश की सूचना थी। बदमाशों ने पहले ही जेसीबी लगाकर गांव के बाहर पुलिस की गाड़ी को रोक दिया। जब पुलिसकर्मी गाड़ी से बाहर निकलकर गांव की तरफ बढ़े तो पहले से घात लगाए बदमाशों ने फायरिंग शुरू कर दी। यह फायरिंग स्प्रिंगफील्ड राइफलों के साथ अन्य अत्याधुनिक असलहों से की गई थी। मौके से एके-47 के खोखे बरामद होने की बात सामने आ रही है। पुलिस अधिकारी भी बदमाशों द्वारा सेमी ऑटोमेटिक वेपन के इस्तेमाल की संभावना जता रहे हैं। डीजीपी ने कहा कि फॉरेंसिंक जांच के बाद ही इस पर कुछ कहा जा सकता है। ऐसा लग रहा है कि फायरिंग में सोफेस्टिकेटड वेपन का इस्तेमाल किया गया।

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