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खाद्य मंत्री रामविलास पासवान ने मजदूरों के लिए मुफ्त राशन की घोषणा में कुछ देर होने की बताई वजह

केंद्रीय खाद्य और आपूर्ति मंत्री रामविलास पासवान ने स्‍वीकार किया है कि कोरोना वायरस की महामारी के चलते लॉकडाउन झेल रहे देश के श्रमिक-गरीब वर्ग के लिए पांच किलो राशन जैसी घोषणा करने में देर हुई है. हालांकि उन्‍होंने इसके पीछे की वजह भी बताई.उन्‍होंने कहा कितने मजदूर-गरीब हैं, यह पता लगाना मुश्किल हैं, ऐसे में घोषणा में कुछ देर होना स्‍वाभाविक है. हमने यह पता लगाने के प्रयास किया कि किस स्‍टेट में कितने मजदूर हैं, इसका सटीक आंकड़ा नहीं मिल पा रहा है, ऐसे में यह फैसला किया गया कि इसे राज्‍य सरकारों को सौंप दें और यह काम करें. पासवान ने एनडीटीवी इंडिया पर संकेत उपाध्‍याय बात करते हुए यह बात कही.

उन्‍होंने कहा कि सरकार की ओर से कोरोना की महामारी के चलते आर्थिक संकट का सामना कर रहे 81 करोड़ लाभा‍र्थियों के लिए के लिए ऐतिहासिक घोषणा की गई है. यह पूछने पर कि क्‍या प्रवासी मजदूरों के लिए प्रति व्‍यक्ति पांच किलोग्राम अनाज पर्याप्‍त है, केंद्रीय खाद्य और नागरिक आपूर्ति मंत्री ने कहा कि पांच किलो अनाज वाला फूड सिक्‍युरिटी एक्‍ट कांग्रेस के समय का है. कांग्रेस ने यह किस हिसाब से रखा था, हम तो उसका पालन करता. यह एक्‍ट यदि 2014 के बाद बनता हो हमारे ऊपर दोषारोपण करना ठीक होता. हम दिन-रात काम कर रहे हैं.

देश में कोरोना वायरस की महामारी को लेकर पासवान ने कहा कि दूसरे देशों के मुकाबले हमारे यहां हालात एक हद तक नियं‍त्रण हैं. दूसरे देशों से तुलना करें तो हमारे यहां संक्रमितों की संख्‍या कम है. प्रधानमंत्री के नेतृत्‍व में सरकार कोरोना की महामारी के खिलाफ जंग पूरी मजबूती के साथ लड़ रही है. गौरतलब है कि राष्‍ट्र के नाम संदेश के दौरान पीएम द्वारा घोषित किए गए आर्थिक पैकेज के अंतर्गत प्रवासी मजदूरों को दो महीने तक मुफ्त राशन मिलेगा. विभिन्न राज्यों में मौजूद प्रवासियों, जो NFSA या राज्य कार्डधारक नहीं हैं, को दो माह तक पांच किलोग्राम अनाज प्रति व्यक्ति तथा एक किलोग्राम चना प्रति परिवार उपलब्ध कराया जाएगा. इससे आठ करोड़ प्रवासी लाभान्वित होंगे. इस पर 3,500 करोड़ रुपये खर्च होंगे, पूरा खर्च केंद्र सरकार वहन करेगी.

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