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PM धन लक्ष्मी योजना के नाम पर फर्जीवाड़ा

PM धन लक्ष्मी योजना के नाम पर फर्जीवाड़ा

सरकारी योजनाओं के नाम पर लोगों को फंसाकर चूना लगाते रहे जालसाजों ने अब महिलाओं, किसानों और कोरोना पीडि़तों को निशाने पर लिया है। ‘पीएम धन लक्ष्मी योजना’ की आड़ में गरीब और मध्यम वर्ग की महिलाओं को मोबाइल पर मैसेज भेजकर पांच लाख रुपये तक का ब्याज मुक्त लोन बगैर गारंटी के दिलाने का झांसा दिया जा रहा। 30 साल में चुकाए जाने वाले लोन का लालच देकर कई जगह पैसों की भी मांग की जा रही। वहीं, सरकार ने साफ किया है कि ऐसी कोई योजना नहीं है। किसी के बहकावे में न आएं।

केंद्र सरकार ने महामारी में लॉकडाउन के चलते बुरी तरह प्रभावित हुए लोगों के आर्थिक उत्थान के लिए कई तरह की योजनाएं शुरू की हैं। इसी की आड़ में ठग भी सक्रिय हो गए हैं। खासकर ग्रामीण इलाकों की महिलाएं और किसान इनके निशाने पर हैं। मैसेज में कहा जा रहा कि केंद्र सरकार 18 से 55 साल की भूमिहीन महिलाओं को यह लोन देगी। महिला के नाम कोई प्रॉपर्टी नहीं होने पर ऋण नहीं दिया जाएगा। इस रकम से वह अपना कोई व्यवसाय या स्वरोजगार शुरू कर सकती हैं।

मोबाइल पर मैसेज के साथ ही यह ठगकई परिवारों को कॉल भी कर रहे। इसमें राष्ट्रीयकृत बैंक में अकाउंट नंबर मांगा जा रहा। धनराशि सीधे बैंक अकाउंट में ट्रांसफर करने का लालच देकर वोटर आइडी कार्ड, पैन कार्ड, बैंक खाते की पासबुक मांगी जा रही। ऑनलाइन आवेदन के नाम पर यह ठग कई लोगों को चूना लगा चुके हैं। वहीं, बड़ी संख्या में लोग आवेदन के लिए सीएचसी सेंटर पहुंच रहे। वहां उन्हें पता चलता है कि ऐसी कोई योजना नहीं है।

साइबर ठग कोरोना वायरस पीडि़तों की सहायता के नाम पर फर्जी संदेश भेज रहे। लिंक खोलते ही पैसे निकल जाते हैं। पीएम रिलीफ फंड और सीएम रिलीफ फंड के नाम पर वेबसाइट और खातों से कटने वाली मासिक किस्त भी ठगी का नया तरीका बनी है। बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ योजना और नौकरियों से लेकर कई सरकारी स्कीमों के नाम पर ठगी कर चुके साइबर अपराधी किसानों को आधे पैसों में नया ट्रैक्टर देने की योजना प्रचारित कर रहे हैं। हिसार सहित विभिन्न जिलों मेें किसान कृषि विभाग के चक्कर लगा रहे, जबकि ऐसी कोई योजना सरकार ने नहीं चलाई है। ऐसे में किसानों से रजिस्ट्रेशन से लेकर डिलीवरी करने के नाम पर पैसे हड़पे जा सकते हैं।

बैंक अधिकारी बन मोबाइल पर खाते की डिटेल लेकर चूना लगाते रहे ठगों ने अब एक और नया तरीका निकाला है। लोगों को फोन कर बैंक की योजनाओं का लाभ देने के लिए उन्हें एक एप डाउनलोड करने के लिए कहा जाता है। इसके बाद मोबाइल पर लिंक भेजते हैं। लिंक पर क्लिक किया नहीं कि खाते में से राशि साफ। सोनीपत के बहालगढ़ में एक निजी कंपनी में इलेक्ट्रिशियन धीरेंद्र कुमार सहित कई लोग इस तरह के फर्जीवाड़े के शिकार हो चुके।

फेसबुक या वाट्स-एप को हैक कर ठगी करने के मामले भी खूब सामने आ रहे। पहले किसी व्यक्ति को चिन्हित कर उसके नाम से फर्जी फेसबुक और वाट्स-एप बनाया जाता है और फिर उसके दोस्तों-रिश्तेदारों से किसी मजबूरी का बहाना बनाकर पैसे मांगे जाते हैं। कई दोस्त और रिश्तेदार ऐसे लोगों के झांसे में आकर मदद के नाम पर पैसे दे भी देते हैं। यह पैसा पे-टीएम और गूगल-पे से लिया जाता है ताकि सीक्रेसी लीक न हो।

लगातार बढ़ते साइबर क्राइम पर अंकुश लगाने के लिए पुलिस ने एडवाइजरी जारी की है। न तो अंजान व्यक्ति से रुपये का लेन-देन करें और न ही अपने बैंक अकाउंट से जुड़ी गोपनीय जानकारी, एटीएम नंबर और पासवर्ड किसी को दें। वन टाइम पासवर्ड यानी ओटीपी भी किसी से साझा न करें। स्क्रीन शेयरिंग से जुड़े एप डाउनलोड न करें। फेसबुक अकाउंट को सुरक्षित रखने के लिए टू स्टेप अथेंटिकेशन का ऑप्शन ऑन रखें। यदि ठगी के शिकार होते हैं तो तुरंत पुलिस को सूचित करें।

UPDATE BY : ANKITA

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