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Coronavirus से किडनी मरीजों को है ज्यादा खतरा

Coronavirus से किडनी मरीजों को है ज्यादा खतरा

किडनी के पेशेंट्स के लिए यह समय दोहरी सतर्कता का है। एक तरफ तो गर्मी के दिन हैं और दूसरी तरफ यह रिपोट्र्स भी आई हैं कि कोरोना के संक्रमण में फेफड़ों के बाद सबसे बड़ा दळ्ष्प्रभाव किडनी पर ही देखा जा रहा है। यह भी स्थापित तथ्य है कि गर्मियों के मौसम में शरीर में पानी की कमी होने के चलते किडनी पर अतिरिक्त भार आ जाता है। इससे किडनी संबंधी बीमारियां बढ़ जाती हैं। इसलिए सतर्क रहें और अपनी किडनियों को यथासंभव स्वस्थ रखें। जानें क्‍या कहते है गुरुग्राम के नारायणा सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल के नेफ्रोलॉजिस्ट डॉ. सुदीप सिंह सचदेव।

किडनी का महत्वपूर्ण कार्य शरीर से टॉक्सिंस को बाहर निकालना है। इसके अलावा विटामिन-डी के अवशोषण, ब्लडप्रेशर पर नियंत्रण, चयापचय प्रक्रिया से निकले अपशिष्ट की निकासी, शरीर में अम्ल-क्षार तथा इलेक्ट्रोलाइट संतुलन काम किडनी ही करती है। यह लाल रक्त कोशिकाओं के निर्माण को गति देती है और शरीर में द्रव का संतुलन बनाए रखती है। मानव शरीर में एक जोड़ी किडनी होती है। एक भी किडनी स्वस्थ हो, तो विभिन्न शारीरिक क्रियाएं कमोबेश सुचारू रूप से चलती रहती हैं। किडनी से जुड़ा कोई लक्षण नजर आए तो तत्काल इलाज जरूरी है, क्योंकि किडनी का रोग तेजी से बढ़ता है और दोनों ही किडनियों को खराब कर देता है।

डायबिटीज, हाई ब्लडप्रेशर, आनुवांशिकता, मूत्राशय के संक्रमण, नेफ्राइटिस जैसी तकलीफों व पेन किलर केअधिक सेवन से किडनी का स्वास्थ्य प्रभावित होता है। किडनी में चोट आदि लगने के कारण मूत्राशय से मूत्र के बैक फ्लो यानी गलत दिशा में प्रवाहित होने और किडनी के लिए नुकसानदेह खानपान से भी किडनी की बीमारी हो सकती है।

अगर केवल प्रोटीन की अधिक मात्रा पेशाब में जा रही हो और किडनी फेल नहीं हुई हैं तो ऐसी स्थिति में परहेज व दवाइयां दी जाती हैं। अगर किडनी किसी अन्य बीमारी के कारण प्रभावित हुई हैं तो भी उनके ठीक होने के आसार काफी होते हैं। इसके अलावा गुर्दे का विकल्प तैयार करना जैसे ही मोडायलिसिस-कम से कम हफ्ते में दो बार, सी.ए.पी.डी., गुर्दा प्रत्यारोपण आदि की मदद ली जाती है। वैसे हर स्थिति में सतर्क रहना जरूरी है।

किडनी रोगों के लक्षण : किडनी की समस्या के कुछ सामान्य लक्षण इस प्रकार हैं-पीठ दर्द, मूत्र त्याग के दौरान रक्त आना, मूत्र की मात्रा और मूत्र त्याग की अवधि में बदलाव (खासकर रात के समय), ब्लड प्रेशर का कम-ज्यादा होना, शरीर में जहां किडनियां मौजूद हैं, वहां दर्द महसूस होना, मूत्र त्याग के दौरान दर्द व जलन महसूस करना, आंखें, चेहरे, पांव व त्वचा के अन्य हिस्सों में वाटर रिटेंशन यानी जल जमाव के कारण सूजन आना व थकान का अनुभव करना।

बेहतर है बचाव : कुछ बातों पर अमल कर किडनी की बीमारी से बचाव कर सकते हैं। जैसे…

जो लोग डायबिटीज से ग्रस्त हैं और जिनका ब्लड शुगर ज्यादा है, तो उन्हें अपनी ब्लड शुगर को नियंत्रित करना चाहिए। ब्लड शुगर नियंत्रण की स्थिति को जानने के लिए डॉक्टर के परामर्श से एचबीए1सी नामक टेस्ट कराएं। यह टेस्ट पिछले तीन महीनों के ब्लड शुगर कंट्रोल की स्थिति को बताता है।
ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखें। यानी 125- 130/75-80 के आस-पास रहे।
किडनी को नुकसान पहुंचाने वाली दवाओं से बचें। जैसे दर्द निवारक दवाएं (पेनकिलर्स)।
स्व-चिकित्सा (सेल्फ मेडिकेशन) न करें।
डॉक्टर की सलाह से ही दवाएं लें।

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