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अयोध्या मामला- बयान दर्ज कराने CBI कोर्ट पहुंचे पवन कुमार

अयोध्या मामला- बयान दर्ज कराने CBI कोर्ट पहुंचे पवन कुमार

अयोध्या के विवादित ढांचा ध्वंस मामले में विशेष अदालत के समक्ष बयान दर्ज कराने पवन कुमार पांडेय पहुंचे। बता दें, बीते दिन पत्नी की बीमारी के चलते आरोपित संतोष दुबे अपना बयान दर्ज कराने के लिए उपस्थित नहीं हो सके।

अदालत ने पूर्व अदालत के समक्ष अधिवक्ता केके मिश्रा ने प्रार्थना पत्र देकर कहा कि संतोष कुमार पत्नी की बीमारी के चलते वह न्यायालय के समक्ष उपस्थित होने में असमर्थ है। अधिवक्ता द्वारा न्यायालय को आश्वासन दिया गया कि संतोष दुबे आगामी 13 जुलाई को बयान के लिए अदालत में उपस्थित होंगे।

जिस पर अदालत ने संतोष दुबे के बयानों के लिए 13 जुलाई की तिथि नियत की है। मुकदमे की पैरवी के लिए अभियोजन की ओर से ललित कुमार सिंह, पूर्णेंदु चक्रवर्ती और आरके यादव मौजूद थे। जिनके अनुरोध पर अदालत में गैरहाजिर चल रहे आरोपित ओमप्रकाश पांडे के विरुद्ध विशेष न्यायाधीश सुरेंद्र यादव ने पुनः वारंट जारी करने का आदेश दिया है।

यह है मामला-अयोध्‍या विवादित ढांचा प्रकरण एक नजर में –

1528: अयोध्या में एक ऐसे स्थल पर मस्जिद का निर्माण किया गया था, जो भगवान राम का जन्मस्थान था। मुगल सम्राट बाबर ने यह मस्जिद बनवाई थी। इसलिए, बाबरी मस्जिद के नाम से जाना जाता था।
1853: हिंदुओं का आरोप है कि भगवान राम के मंदिर को तोड़कर मस्जिद का निर्माण हुआ। इस मुद्दे पर हिंदुओं और मुसलमानों के बीच पहली हिंसा हुई।
1885: मामला पहली बार अदालत में पहुंचा। महंत रघुवरदास ने फैजाबाद अदालत में बाबरी मस्जिद से लगे राममंदिर के निर्माण की इजाजत के लिए अपील दायर की।
23 दिसंबर 1949: करीब 50 हिंदुओं ने मस्जिद के केंद्रीय स्थल पर कथित तौर पर भगवान राम की मूर्ति रख दी। इसके बाद उस स्थान पर हिंदू नियमित रूप से पूजा करने लगे। मुसलमानों ने नमाज पढ़ना बंद कर दिया।
17 दिसंबर 1959: निर्मोही अखाड़ा ने विवादित स्थल हस्तांतरित करने के लिए मुकदमा दायर किया।
18 दिसंबर 1961: उत्तर प्रदेश सुन्नी वक्फ बोर्ड ने विवादित स्थल के मालिकाना हक के लिए मुकदमा।
1984: विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) ने विवादित स्थल का ताला खोलने और एक विशाल मंदिर के निर्माण के लिए अभियान शुरू किया। एक समिति का गठन किया गया।
01 फरवरी 1986: फैजाबाद जिला न्यायाधीश ने विवादित स्थल पर हिंदुओं को पूजा की इजाजत दी। ताला दोबारा खोला गया। नाराज मुस्लिमों ने विरोध में बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी का गठन किया।
01 जुलाई 1989: भगवान रामलला विराजमान नाम से पांचवां मुकदमा दाखिल किया गया।
09 नवंबर 1989: तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी की सरकार ने विवादित स्थल के नजदीक शिलान्यास की इजाजत दी।
06 दिसंबर 1992: हजारों की संख्या में कारसेवकों ने अयोध्या पहुंचकर विवादित ढांचा ढहा दिया, जिसके बाद देश के कई हिस्सों में सांप्रदायिक दंगे हुए। जल्दबाजी में एक अस्थायी राममंदिर बनाया गया। प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव ने मस्जिद के पुनर्निर्माण का वादा किया।
2002 अप्रैल: अयोध्या के विवादित स्थल पर मालिकाना हक को लेकर उच्च न्यायालय के तीन जजों की पीठ ने सुनवाई शुरू की।
2005 जुलाई: आतंकवादियों ने विस्फोटक से भरी एक जीप का इस्तेमाल करते हुए विवादित स्थल पर हमला किया। सुरक्षा बलों ने पांच आतंकवादियों को मार गिराया।
28 सितंबर 2010: सर्वोच्च न्यायालय ने इलाहबाद उच्च न्यायालय को विवादित मामले में फैसला देने से रोकने वाली याचिका खारिज करते हुए फैसले का मार्ग प्रशस्त किया।
30 सितंबर 2010: इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया।
30 सितंबर 2010: इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया. इलाहाबाद हाई कोर्ट ने विवादित जमीन को तीन हिस्सों में बांटा जिसमें एक हिस्सा राम मंदिर, दूसरा सुन्नी वक्फ बोर्ड और निर्मोही अखाड़े में जमीन बंटी।
9 मई 2011: सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले पर रोक लगा दी।
जुलाई 2016: बाबरी मामले के सबसे उम्रदराज वादी हाशिम अंसारी का निधन।
21 मार्च 2017: रामजन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने मध्यस्थता की पेशकश की। चीफ जस्टिस जेएस खेहर ने कहा कि अगर दोनों पक्ष राजी हों तो वह कोर्ट के बाहर मध्यस्थता करने को तैयार हैं।
19 अप्रैल 2017: सुप्रीम कोर्ट ने बाबरी मस्जिद गिराए जाने के मामले में लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, उमा भारती सहित बीजेपी और आरएसएस के कई नेताओं के खिलाफ आपराधिक केस चलाने का आदेश दिया।
अयोध्‍या ढांचा ध्‍वंस मामले में 6 द‍िसंबर को थाना राम जन्‍मभूम‍ि में एफआइआर दर्ज कराई गई थी। इस मामले में सीबीआइ ने जांच करते हुए 49 आरोप‍ितों के ख‍िलाफ व‍िशेष अदालत में आरोप पत्र दाख‍िल क‍िया था। वहीं, आरोप‍ितों में से 17 की मौत हो चुकी है।

UPDATE BY : ANKITA

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